अभी समय है जागो सब

अन्तर्मन में है छाया विषाद,
यह क्रूर दनुज सा आतंकवाद।
करो मरो का उद्घोष करो,
जन-जन अब प्रतिरोध करो।
छिपे शत्रु हैं उनको पहचानें,
मिलकर आज विरोध करो।
अभी समय है जागो सब,
नयनों की निद्रा त्यागो अब।
भारी होगा वैचारिक प्रमाद।
अन्तर्मन में है छाया विषाद।
छिपे समर्थक जो उनके हैं,
वे शत्रु देश के न अपने हैं।
सावधान रहना उनसे भी,
एकात्म भाव हो सबसे ही।
भारत की सैन्यशक्ति अब,
महासमर में संधान करो।
भारत के जनमानस में हो,
केवल-केवल अब राष्ट्रवाद।।

रचयिता
सतीश चन्द्र "कौशिक"
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय अकबापुर,
विकास क्षेत्र-पहला, 
जनपद -सीतापुर।

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