२७७~ छाया प्रकाश (प्रधानाध्यपक) प्राथमिक विद्यालय गिरिया खालसा, चायल, कौशाम्बी

🏅अनमोल रत्न🏅
मित्रों आज हम आपका परिचय मिशन शिक्षण संवाद के माध्यम से एक ऐसे विद्यालय से करा रहे हैं। जिसने आपसी सहयोग और सकारात्मक सोच की शक्ति से हम सब के लिए अनुकरणीय उपलब्धि को प्राप्त किया है।
आज जहाँ बेसिक शिक्षा के विद्यालयों की सबसे समस्याओं में से एक बहुत बड़ी समस्या है विद्यालय के शिक्षकों में आपसी तालमेल और सहयोग का अभाव। यह प्रतिशत इतना अधिक है कि यदि सभी शिक्षक विद्यालय और बच्चों के हित, विकास और भविष्य के लिए सकारात्मक सोच के साथ एक-दूसरे के सहयोगी बन जायें। तो प्रदेश की बेसिक शिक्षा के लगभग 50% विद्यालयों को मात्र एक वर्ष में आदर्श बनने से कोई नहीं रोक सकता है।
वहीं ऐसे भी कुछ अनमोल रत्न विद्यालय परिवार हैं जिन्होंने आपस में मिल कर अपने विद्यालय को आदर्श विद्यालय बनाने में कामयाबी प्राप्त की है। यह हम जैसे उन हजारों शिक्षकों के लिए अनुकरणीय हैं जिन्होंने आपसी सहयोग और सामन्जस्य के लिए हम सभी को प्रेरित किया है।
आइये देखते हैं विद्यालय परिवार के सहयोगी एवं अनुकरणीय प्रयासों को:

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मैं छाया प्रकाश प्र०अ० प्राथमिक विद्यालय गिरिया खालसा, चायल-कौशाम्बी में कार्यरत हूँ। मेरी प्रथम नियुक्ति वर्ष-2009 में हुई तथा पदोन्नत होकर मैं वर्ष-2013 में प्राथमिक विद्यालय गिरिया खालसा, चायल में प्रधानाध्यापक पद पर नियुक्ति हुई।

मेरी नियुक्ति की अवधि में विद्यालय का भौतिक परिवेश बहुत ही दयनीय था। विद्यालय परिवेश गंदा एवं विद्यालयी सामग्री का अभाव था। विद्यालय में नामांकन के सापेक्ष बच्चों कि उपस्थिति बहुत कम थी।
बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने हेतु हमने ग्राम भ्रमण के द्वारा अभिभावकों से संपर्क किया और उनसे अनुरोध किया कि वे प्रतिदिन अपने बच्चों को समय से विद्यालय भेजें एवं समय-समय से विद्यालय आकर अपने बच्चों के ज्ञान एवं उन्नति की जानकारी प्राप्त करते रहे एवं विद्यालय में सुधार हेतु अपने सुझाव को व्यक्त करे।
मेरे इस प्रयास द्वारा बच्चों की उपस्थिति में संतोषजनक परिवर्तन हुए एवं विद्यालय के ठहराव में वृद्धि हुई।

मेरी नियुक्ति के समय विद्यालय भवन की खिड़कियां, मेज एवं कुर्सियां टूटे-फूटे हुए थे तथा विद्यालय में उपयोगी संसाधनों का अभाव था, जिसमे सुधार हेतु मैंने स्वयं की धनराशि एवं विद्यालय अनुदान के द्वारा कमरों की खिड़कियां एवं कार्यालय के प्रयोग हेतु मेज़, कुर्सियां, vidhylaya अभिलेखों हेतु रजिस्टरों तथा बच्चों की शिक्षण अधिगम सामग्रियों की व्यवस्था की।


       
           
विद्यालय के विकास में विद्यालय के शिक्षकों -पाल चंद्रिका, नीलम सिंह, नाजमी खातून एवं सुषमा यादव ने भरपूर योगदान दिया।

छात्र संख्या एवं वार्षिक उपस्थित का प्रतिशत तथा नामांकन एवं उपस्थित बढ़ाने हेतु मैंने विद्यालय में बाल संसद का गठन, बाल स्वच्छ्ता निगरानी समिति का गठन, बाल अखबार का प्रकाशन, स्टार ऑफ़ द वीक, स्टार ऑफ द मंथ, स्टूडेंट ऑफ द डे, बच्चों का जन्मदिन मनाने का आयोजन तथा अभिवावकों को सम्मानित करने का प्रयास किया जिसके फलस्वरूप नामांकन 200 हो गया एवं नामांकन के सापेक्ष उपस्थिति भी 80% तक रहने लगी।

विद्यालय के बच्चों ने ब्लॉक स्तरीय तथा जनपद स्तर पर tlm की प्रदर्शनी में सहभाग किया।
विद्यालय में शिक्षण व्यवस्था के सुधार हेतु हमने गतिविधि आधारित शिक्षा पद्धिति, खेल द्वारा शिक्षा एवं शिक्षा में उत्सुकता एवं समझ बढ़ाने हेतु विभिन्न प्रकार की शिक्षण अधिगम सामग्रियों के प्रयोग द्वारा, एवं खेलकूद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजनों द्वारा शिक्षण अधिगम प्रकिया में सुधार करने का प्रयास किया।

हमारे विभिन्न प्रयासों द्वारा बच्चों का नामांकन तथा उपस्थिति में सुधार हुआ तथा शिक्षण व्यवस्था एवं शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में सुधार हुआ, जिसके लिए हमें जिलाधिकारी महोदय द्वारा स्वच्छ्ता प्रमाण पत्र तथा प्रंशसा पत्र खंड शिक्षा अधिकारी एवं बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया तथा हमारा विद्यालय आदर्श विद्यालय हो गया।

SCERT द्वारा आयोजित कहानी प्रतियोगिता में भी पुरस्कार मिला साथ ही टीचर्स क्लब द्वारा आयोजित मिशन शिक्षण संवाद कार्यशाला में बेसिक शिक्षा निदेशक सर्वेंद्र विक्रम सर द्वारा भी सम्मानित होने का मौका मिला।।।

अन्य शिक्षकों के लिए मेरा यही सुझाव है कि लगन, मेहनत तथा सकरात्मक प्रयासों द्वारा हम शिक्षा एवं समाज मे सुधार कर सकते हैं।

साभार
छाया प्रकाश (प्रधानाध्यपक)
प्राथमिक विद्यालय गिरिया खालसा, चायल, कौशाम्बी

संकलन: दीप नारायण मिश्र
मिशन शिक्षण संवाद कौशांबी

नोट: आप अपने मिशन परिवार में शामिल होने, आदर्श विद्यालय का विवरण भेजने तथा सहयोग व सुझाव को अपने जनपद सहयोगियों को अथवा मिशन शिक्षण संवाद के वाट्सअप नम्बर-9458278429 और ई-मेल shikshansamvad@gmail.com पर भेज सकते हैं।

सहयोगी मिशन परिवार
विमल कुमार
18-11-2018

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