माँ

इस जग में तुम ही मुझको लेकर आयी
जबसे मैंने होश सँभाला, बस तुमको ही देखी माँ
जीवन के हर दुर्गम पथ पर,
हर दुःख में, हर संकट में तुमको ही पास पायी माँ
सूखे में मुझे सुलाकर, खुद गीले में सो जातीं
मुझे सुलाने की खातिर, तुम रात-रात भर जागी माँ ।
बोसा-बोसा मुझे खिलाकर, ख़ुद भूखी  रह जाती माँ
गलती जब मुझसे हो जाती, डाँट खिलाती, मार लगाती
कोने में फिर बैठ अकेली, सिसक-सिसककर रोती माँ
काँटों भरी राह पर मेरी, चुन- चुन फूल बिछाती माँ
कितना कोमल, कितना निर्मल
स्नेह भरा तेरा अन्तस्तल,
जो चाहा पाना मैंने, वो सब तुम मुझे दिलातीं माँ
तुम ही पूजा, तुम ही श्रद्धा तुम बिन मेरा कोई न दूजा,
ईश्वर के हर रूप में मैंने तुझको ही बस पाया माँ,
सृष्टि के  कण-कण में प्रेम तुम्हारा मुखरित है,                         जीवन का हर सुख मिल जाता तेरे पास जब आयी माँ।।

रचयिता
अरूणा कुमारी राजपूत,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय राजपुर(अंग्रेजी़ माध्यम),
विकास खण्ड-सिंभावली , 
जिला-हापुड़।

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