अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेषांक,76,शाहिस्ता खान ,शामली

*👩🏻‍🏫अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेषांक*

*मिशन शिक्षण संवाद परिवार की बहनों की संघर्ष और सफ़लता की कहानी*

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*👩‍👩‍👧‍👧महिला सशक्तीकरण- 76*
(दिनाँक- 18 मई 2019)

नाम:-शाहिस्ता खान
पद :-सहायक अध्यापक
विद्यालय:-कन्या जूनियर हाई स्कूल लिलौन, ब्लॉक शामली, जनपद शामली
सफलता एवं संघर्ष की कहानी :-
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मेरा नाम शाहिस्ता खान है मैं कन्या जूनियर हाई स्कूल लिलौन, ब्लॉक शामली, जनपद शामली में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत हूं, मेरे द्वारा वर्ष 2014 पदोन्नति के पश्चात यहां कार्यभार ग्रहण किया गया, उक्त समय मेरे विद्यालय के भवन से लेकर छात्र संख्या अति दयनीय थी जोकि लगभग 70 या 80 होगी जिसको यहां की परिस्थिति अनुरूप बढाना एक बड़ी चुनोती था और उससे भी बड़ी चुनोती विद्यालय प्रांगण के पास में ही नया राजकीय विद्यालय खुल गया । अब हमारे सामने बच्चों का नामांकन बढ़ाना और उन्हें अपने विद्यालय मे रोकना एक चुनौती हो गई जिसके लिए मेरे व स्टाफ द्वारा गांव में घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क किया जिन मुस्लिम लड़कियों ने उनकी किसी मजबूरी के चलते बीच मे ही पढ़ाई छोड़ दी थी उनके घर वालों को समझाया, जिसके लिए हमें व्यक्तिगत उनके घर पर कई-कई बार जाकर अभिभावकों को उन लड़कियों की पढ़ाई के महत्व को समझाकर पुनः स्कूल प्रवेश करने में सफलता प्राप्त की जिसका परिणाम अब हमारे विद्यालय में 196 बच्चों का नामांकन है । हमने नामांकन मेले लगाए कुछ अभिभावक अपनी बड़ी लड़कियों को स्कूल में भेजने से मना कर रहे थे कि हमारी लड़कियां बड़ी (स्यानी) हो गई है माहौल सही नहीं है, फिर पढ़ा कर क्या करना है, कौन सी उनकी नौकरी लग जाएगी, ऐसे ढेरो प्रश्नों से हमे बारम्बार जूझना पड़ा किन्तु जब हमने उन्हें  समझाया के हम लड़कियों को सशक्त बनाएंगे, उन्हें अपनी आत्म रक्षा करना सिखाएंगे ताकि वह सभी परिस्थितियों से डटकर मुकाबला कर सके ।
खेलों में भी लड़कियों को लड़कों के समान मौका दिया, उन्हें भी समझाया कि तुम किसी से कम नहीं हो और हमारी विद्यालय की लड़कियां अब कबड्डी, दौड़, ऊंची कूद आदि सभी खेलों में भाग लेती हैं साथ ही शिक्षण में रोचकता लाने के लिए विभिन्न नवाचारो का प्रयोग किया । हमारी मेहनत और लगन देखकर यूनिसेफ टीम द्वारा हमारे विद्यालय के ऊपर एक  डॉक्यूमेंट्री मूवी बनाई जिससे बच्चो में एक अजब सा उत्साह पैदा हुआ और जो बच्चे कम बोलते थे वह आज खूब, बेजीझक बोलते हैं और जब मैं विद्यालय जाती हूं जाते ही मुझे देख कर बोलते हैं मैडम आज हम नया क्या करेंगे ? जोकि मेरे लिए उत्साह भरने जैसे शब्द होते है मानो हमारी मेहनत रंग ला रही है । बच्चों की रुचि के अनुरूप हमारे द्वारा वही काम कराये जाते हैं जिससे बच्चे और अच्छा करते हैं । हम लोगों का एक बेहतर टीमवर्क है, हम सब मिलकर काम करते हैं ।

_मंजिले तो बहुत है कुछ कर आगे बढ़ कदम एक तुम्हारा होगा ।_
_कारवां पीछे तुम्हारे होगा होना है यदि सफल तो मेहनत से ना डर।_

_✏संकलन_
*📝टीम मिशन शिक्षण संवाद।*

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