जीवन योजना
साप्ताहिक योजना बनानी होगी,
जीवन डगर फिर सुहानी होगी।
स्वआकलन करते रहना होगा,
रिमीडियल भी तब करना होगा।।
गुणों का हम करते जाएँ गुना,
अवगुण प्रवेश को कर दें मना।
घटाने की प्रक्रिया वहाँ लगाएँ,
पर निंदा हो तो भाग लगाएँ।।
जोड़-जोड़ कर समूह बनाएँ,
ज्योत् से ज्योत् बढ़ाते जाएँ।
ज्ञानागंगा में गोते लगाएँ,
मिल देश भक्ति तराना गाएँ।।
स्वाध्याय अपना करते जाएँ,
हर क्षण से हम जोड़ी बनाएँ।
अपने से अपनी मीटिंग हो,
व्यवस्थित जीवन सैटिंग हो।।
रचयिता
प्रतिभा भारद्वाज,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यामिक विद्यालय वीरपुर छबीलगढ़ी,
विकास खण्ड-जवां,
जनपद-अलीगढ़।

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