तेरी वसुंधरा!

कितनी सुंदर तेरी धरा,

हरियाली ऊपर हरियाली नीचे,

कैसी तेरी वसुंधरा;


हरा आसमां विटप हरा,

सरिता हरी, समुंदर हरा,

हरा भरा तेरा जहां;


मयूर चमकीला, सजा पंख हरा,

कोयल कूकी मतवाली,

आया वसंत हरा;


कालियाँ चटकी,

रंगीले फूल खिले,

हवाओं में ख़ुशबू, उड़ा रंग हरा;


चारों दिशाएँ गायें,

राग तेरा गुनगुनायें,

धरती तेरी हथेली, मेहंदी का रचा रंग हरा;


तू बादशाह सनातन का,

सृष्टिकर्ता सारी प्रकृति का,

तेरी कुप्पी में सब रंग भरा!


कितनी सुंदर तेरी धरा,

हरियाली ऊपर हरियाली नीचे,

कैसी तेरी वसुंधरा;


रचयिता
मीरा कन्नौजिया,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय हरखपुर,
विकास खण्ड-सिकरारा, 
जनपद-जौनपुर।

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