74/2026, बाल कहानी- 24 अप्रैल

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 74/2026
*24 अप्रैल 2026 (शुक्रवार)*
#बाल_कहानी- #शिक्षा_का_महत्व
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बौखर सरीला तहसील का एक छोटा सा गाँव है। बौखर में एक प्राथमिक विद्यालय व एक उच्च प्राथमिक विद्यालय है। एक अप्रैल से नये सत्र का आरम्भ हुआ। प्राथमिक विद्यालय बौखर के प्रधानाध्यापक महेन्द्र कुमार सोनी जी ने बताया कि, "स्कूल चलो अभियान के अन्तर्गत हम सभी शिक्षकों को घर-घर जाकर सर्वे करना है।और बच्चों को स्कूल आने के लिए प्रेरित करना है। हमें पूरे गाँव में शिक्षा के महत्व को समझाना है।" 
अगले दिन स्कूल के शिक्षक गनेश के घर पहुँचे, तो वहाँ स्कूल के सहायक अध्यापक प्रदीप कुमार जी ने गनेश के पिता को शिक्षा का महत्व समझाया और बताया कि, "अब स्कूल में निःशुल्क किताबें, डीबीटी के तहत खाते में बारह सौ रूपये की सहयोग राशि और पौष्टिक मिड-डे-मील भोजन भी मिलता है।"
शिक्षकों की बात सुनकर गनेश के पिता को समझ आया कि, "शिक्षा कितनी जरूरी है?" अगले दिन गनेश को उसके माता-पिता ने स्कूल भेजना शुरू किया। गनेश को स्कूल में अच्छा नहीं लग रहा था, लेकिन जब शिक्षकों ने उसे प्यार से पढ़ाना और खेलना सिखाया तो धीरे-धीरे गनेश का मन पढ़ाई में लगने लगा। वहाँ उसके नये दोस्त भी बन गये। बिट्टो उसकी सबसे अच्छी दोस्त है, जो उसकी क्लास में पढ़ती है।
गनेश के नियमित स्कूल जाने से और पढ़ाई में सुधार होने से गाँव के अन्य माता-पिता भी जागरूक हुए और अपने बच्चों को प्राथमिक विद्यालय बौखर भेजने लगे, जिससे बौखर गाँव में शिक्षा की अलख जग गई।

#संस्कार_सन्देश - 
शिक्षा ज्ञान, कौशल और नैतिक मूल्य प्रदान कर जीवन को बेहतर और आत्मनिर्भर बनाती है। यह आत्मविश्वास, सोचने की क्षमता और सामाजिक चेतना को भी विकसित करती है।

कहानीकार- 
#मिथुन_भारती (स०अ०)
प्राथमिक विद्यालय बौखर
सरीला, हमीरपुर (उ०प्र०)

✏️संकलन
टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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