71/2026, बाल कहानी- 21 अप्रैल

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 71/2026
*21 अप्रैल 2026 (मंगलवार)*
#बाल_कहानी - #रोशनी_का_अँधेरा
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रामदास ने खेत बेचकर बेटे विवेक के लिए महँगा मोबाइल खरीदा था। सोच यही थी-, “जो हमें नहीं मिला, वह अपने बच्चे को देंगे… हमारा बेटा हमसे आगे निकलेगा।”
शुरू-शुरू में सब ठीक लगा। विवेक ऑनलाइन क्लास करता, टीचर की तारीफ करता, और स्क्रीन पर झुका रहता। रामदास और उसकी पत्नी गर्व से भर जाते-, “देखो, हमारा बेटा तो घर बैठे ही पढ़-लिखकर टॉपर बनेगा।”
धीरे-धीरे कुछ बदलने लगा। किताबों की जगह मोबाइल ने ले ली। रातें लंबी होने लगीं, सुबहें सुस्त। आँखों में जलन, बात-बात पर गुस्सा और छोटी-छोटी बात पर झगड़ा।
“बस पाँच मिनट और…”
विवेक हर बार यही कहता, लेकिन वह पाँच मिनट कभी खत्म नहीं होते। एक दिन स्कूल से फोन आया-, “आपका बेटा कई दिनों से क्लास में ध्यान नहीं दे रहा… और टेस्ट में भी बहुत पीछे है।” सुनकर रामदास के पैरों तले जमीन खिसक गई। घर आकर उसने देखा कि विवेक मोबाइल में हँस रहा था…किसी गेम में जीतने की खुशी में। रामदास ने धीरे से पूछा, “बेटा! पढ़ाई…?”
विवेक ने बिना सिर उठाए कहा,
“सब आ जाता है पापा! आप नहीं समझेंगे।” उस रात रामदास बहुत देर तक जागता रहा। उसे पहली बार लगा कि जिस रोशनी के लिए उसने सब कुछ दाँव पर लगा दिया, वही उसके घर का अँधेरा बन गई है।

#संस्कार_सन्देश -
मोबाइल ज्ञान का साधन बन सकता है, लेकिन बिना नियन्त्रण के वही आदत, लत और बिगड़ाव का कारण भी बन जाता है।

कहानीकार-
#दयावती (स०अ०)
प्राथमिक विद्यालय शेखनपुरवा प्रथम
ब्लॉक- चितौरा, जिला- बहराइच

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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