78/2026, बाल कहानी- 29 अप्रैल
#दैनिक_नैतिक_प्रभात -
78/2026
*29 अप्रैल 2026 बुधवार)*
#बाल_कहानी - #शिक्षा_का_महत्व
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रोहन एक छोटे से गाँव का लड़का था। वह शहर में अपनी मौसी के पास रहता था। वहीं रहकर वह अपनी पढ़ाई कर रहा था। इस बार उसने आठवीं की परीक्षा दी थी। गाँव में उसके पिता खेती बाड़ी करते थे।
हर बार गर्मियों की छुट्टियों में वह अपने माता-पिता के पास जाता था। इस बार भी वह अपने माता-पिता से मिलने गाँव गया।
रोहन के गाँव में कोई ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं था। सब खेती किसानी और मजदूरी करते थे।
वे शिक्षा को जरूरी नहीं समझते थे। उनका मानना था कि प्रत्येक व्यक्ति को काम-धन्धा करना चाहिए। पढ़ाई में समय बर्बाद नहीं करना चाहिए।
इस बार जब वह घर पहुँचा, उसने देखा कि गाँव में कुछ भी नहीं बदला है। सालों पहले जैसा गाँव था, वैसा ही है। आज
रोहन अपने घर पर अकेला था और पिता खेत में काम करने गए थे, तभी उसने गाँव में कुछ शोर सुना और उत्सुकता से उसने वहाँ जाकर देखा तो गाँव के कुछ लोग एक व्यक्ति को घेरे खड़े थे। वह उस पर तरह-तरह के आरोप लगा रहे थे।
रोहन भी आगे बढ़कर वहाँ पहुँचा तो उसने देखा कि एक व्यक्ति लोगों को समझा रहा था कि, "मैं जहाँ जनगणना करने आया हूँ और एक सरकारी कर्मचारी हूँ।" पर गाँव वाले उस पर विश्वास नहीं कर रहे थे।
रोहन उनके पास गया और उस व्यक्ति से बातचीत की, फिर उनका आई कार्ड और अन्य संग सामान भी ठीक से देखा।
जब रोहन को पूरी तसल्ली हो गई। तब उसने गाँव वालों को बताया कि, "हमारे गाँव में जनगणना कार्य के लिए आये हैं। इनका इरादा हमें नुकसान पहुँचाना या चोरी करना नहीं है। सरकार प्रत्येक दस साल में जनगणना कार्य करती है, जिससे देश की प्रगति और विकास के लिए योजनाएँ बनायी जा सकें।"
गाँव वालों को अब पूरी बात समझ में आ चुकी थी और उन्होंने उस व्यक्ति से माफी भी माँगी तथा जनगणना कार्य में उनका पूरा सहयोग भी किया। साथ ही रोहन की खूब तारीफ की।
गाँव वाले अब समझ चुके थे की जीवन में शिक्षित होना कितना जरूरी है? उन्होंने तय किया कि अब से वह अपने बच्चों को भी विद्यालय भेजेंगे और उन्हें भी शिक्षित करेंगे।
#संस्कार_सन्देश -
रोहन की सजगता ने न केवल एक सरकारी कर्मचारी को गाँव वालों के गुस्से से बचाया, बल्कि पूरे गाँव की सोच को भी बदल दिया। जहाँ गाँव वाले शिक्षा को 'समय की बर्बादी' मानते थे, वहीं रोहन के ज्ञान ने उन्हें यह अहसास कराया कि शिक्षा ही वह चाबी है जो प्रगति के द्वार खोलती है।
कहानीकार-
#मृदुला_वर्मा (स०अ०)
प्रा० वि० अमरौधा प्रथम
अमरौधा (कानपुर देहात)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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