61/2026, बाल कहानी- 09 अप्रैल
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 61/2026
*09 अप्रैल 2026 (गुरुवार)*
#बाल_सृजन - #समय_बदल_रहा_है
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ऐसा लग रहा था, मानो आज स्कूल में मेला होने जा रहा हो। दो-तीन दिन पूर्व से ही विद्यालय के शिक्षक आज होने जा रहे प्रवेशोत्सव की तैयारियों में जुटे हुए थे। पाठशाला में नये प्रवेश ले रहे बच्चों की जानकारी के साथ-साथ उनके अभिभावकों से सम्पर्क, पहले से पढ़ रहे बच्चों के अभिभावकों तथा एस० एम० सी० के अध्यक्ष/ सदस्यों व ग्राम प्रधान के साथ ही अनेक गणमान्य व्यक्तियों को प्रवेशोत्सव के अवसर पर विद्यालय में उपस्थित होने का आग्रह किया गया था।
आज प्रात: से ही स्कूल परिसर को सजाया जाने लगा। फूलों, गुब्बारों व मालाओं को यथास्थान सजा, सारा परिसर दमकने लगा। आगन्तुकों के लिए कुर्सियाँ सजाई गयीं और बच्चों के लिए नयी दरी बिछाई गई।
थोड़ी देर बाद आगन्तुक गण एवं अभिभावक पधारने लगे। सभी को विद्यालय स्टाफ द्वारा ससम्मान कुर्सियों व बेंचों पर बिठाया जा रहा था। इसी बीच नन्हा मोहन भी अपने माता-पिता के साथ विद्यालय पहुँचा। उन्हें देखते ही प्रधानाध्यापक महोदय द्वारा ससम्मान कुर्सी पर बैठने का आग्रह कर मोहन को पुचकारते हुए उसके गले में फूलमाला डाली गई। सभी लोगों ने तालियाँ बजायी और खुशी प्रकट की। इसी तरह आठ अन्य नव प्रवेशित बच्चों को भी सम्मानित किया गया। प्रधानाध्यापक महोदय द्वारा सभी का अभिनन्दन करते हुए नव प्रवेशित बच्चों व उनके अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया तथा पूर्व से पढ़ रहे। बच्चों व उनके अभिभावकों को धन्यवाद दिया गया। विद्यालय में बेहतर शैक्षिक व भौतिक वातावरण बनाने हेतु सभी गणमान्य व्यक्तियों की राय और स्कूल स्टाफ की ओर से किए जा रहे प्रयासों की जानकारी सभी को प्रदान की गई।
नव प्रवेशित बच्चों के स्वागत से आज अभिभावक गदगद थे। नन्हे मोहन के पिता ने बताया कि, "पूर्व में अनेक कारणों से गाँव के बच्चे पढ़ने के लिए अन्यत्र जाने लगे, जिससे यह विद्यालय सूना-सा होने लगा था। लेकिन विगत दो वर्षों से पर्याप्त स्टाफ व मेहनती शिक्षकों के सफल प्रयासों से पुनः इस विद्यालय के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ा है और अब समय बदल रहा है।" सभी लोगों ने उनकी बातों का समर्थन करते हुए जोर-जोर से तालियाँ बजायीं। लोगों को चाय, बिस्कुट, नमकीन तथा बच्चों को मिठाई , टाफियाँ व नई किताबें वितरित की गयीं। फूल-मालाओं से सजे नव प्रवेशी बच्चों के फोटोग्राफ लिए गए। जाते हुए बच्चों को गुब्बारे पकड़ाये गये, जिन्हें हवा में लहराकर बच्चे फूले न समा रहे थे।
#संस्कार_सन्देश -
नये सत्र में बच्चों के प्रवेश हेतु रैली, गोष्ठियाँ और विभिन्न कार्यक्रम जरुरी हैं, जिससे अभिभावकों को प्रेरणा मिलती है।
कहानीकार-
दीवान सिंह कठायत (प्र०अ०)
रा० आ० प्रा० वि० उडियारी बेरीनाग पिथौरागढ (उत्तराखण्ड)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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