75/2026, बाल कहानी- 25 अप्रैल
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 75/2026
*25 अप्रैल 2026 (शनिवार)*
#बाल_कहानी- #संस्कारों_की_छाप
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रीता नाम की एक लड़की कक्षा चार में पढ़ती थी। वह पढ़ने-लिखने में बहुत होशियार थी। वह विद्यालयीय गतिविधियों, खेलों और पढ़ाई पर विशेष ध्यान देती थी। वह जानती थी कि अगर जीवन को सँवारना है तो हमें आगे पढ़कर बढ़ना ही होगा। उसे अपनी माँ के अन्तिम समय में कहे शब्द आज भी रोज याद आते हैं-, "बेटा! जीवन में कुछ करो न करो लेकिन पढ़ाई जरुर करना। पढ़ना, खेल और व्यायाम ये हमारे जीवन के प्रमुख अंग होना चाहिए, तभी हमें अपनी मन्जिल मिलती है। शिक्षा सभी को सँवारती है और सँवारती आयी है, मात्र खेल-कूद से किसी का कभी भला नहीं हुआ। पढ़ाई के साथ-साथ खेल हो तो वह गतिविधि बन जाता है, जिसमें बहुत कुछ छिपा रहता है। अगर हमें अपने समाज, देश और अपना नाम ऊँचा करना है तो जीवन में प्रेम से रहते हुए संघर्ष करना पढ़ेगा। बिना परिश्रम के कभी सफलता नहीं मिलती है। कभी-कभार तो बार-बार परिश्रम करने के बाद ही सफलता मिलती है।"
माँ के शब्दों को याद करती रीता पढ़ाई में व्यस्त रहती। घर पर पिता के कामों में हाथ बँटाती, शाम को खेलती और खुश रहती। स्कूल में यदि कोई छात्र/छात्रा उसे बाहर जाने, इधर-उधर घूमने के लिए उकसाते तो वह स्पष्ट रूप से मना कर देती फिर किसी का उससे कुछ कहने का साहस नहीं होता। कुछ छात्र/छात्रायें उसकी हँसी जरुर उड़ाया करती थीं लेकिन वह इन पर कभी ध्यान नहीं देती थी। वह मुस्कुराकर वहाँ से निकल जाती या देखती रहती।
सोने से पहले उसके पिता उसे रामायण और भागवत, महाभारत की कथायें सुनाया करते और धार्मिक धारावाहिक नाटक रोज दिखाते। पारिवारिक फिल्में भी सप्ताह में एक बार दिखाते ताकि वह बाहर और भीतर से खूब मजबूत हो सके। इस प्रकार उस पर निरन्तर संस्कारों की छाप पढ़ती रही और वह पढ़ते हुए जीवन में आगे बढ़ती रही। आगे चलकर यही रीता केन्द्रीय विभाग में महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त हो गयी। उसकी मेहनत और महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति देखकर सभी आश्चर्यचकित थे।
#संस्कार_सन्देश -
हमें जीवन में प्रत्येक कर्म सोच-समझकर और पढ़-लिखकर, बड़ों की सलाह से करना चाहिए, तभी हम आगे बढ़ सकते हैं।
कहानीकार-
#जुगल_किशोर_त्रिपाठी
प्रा० वि० बम्हौरी (कम्पोजिट)
मऊरानीपुर, झाँसी (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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