58/2026, बाल कहानी- 06 अप्रैल

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 
58/2026
*6 अप्रैल 2026 सोमवार)*
#बाल_कहानी - #सच्ची_ईमानदारी
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रामसिंह एक बड़ा कारोबारी था। उसके साथ बहुत सारे कर्मचारी काम करते थे। उसकी उम्र साठ वर्ष हो चली थी। उसके दो पुत्र थे, जो बाहर नौकरी करते थे।
अब वह पहले की तरह अपने कारोबार की देखभाल नहीं कर पा रहा था। इसलिए उसने अपने कारोबार को किसी विश्वास पात्र कर्मचारियों की देखरेख मे करने का निश्चय किया, जो मेहनती और ईमानदार हो।
इसके लिए उसने सभी कर्मचारियों को अपने पास बुलाया और कहा, "यह कुछ बीज ले लो और इन्हें अपने गमले में लगाना। उनकी खूब देखभाल करना और एक महीने बाद जिसका पौधा सबसे अच्छा होगा, मैं उसे अपने कारोबार मे
विशेष स्थान दूँगा। सभी कर्मचारी बहुत खुश हुए और बीज लेकर अपने घर चले गये। उनको उन्होंने अपने गमले में लगाया और उनकी देखभाल करने लगे।
मोहन जो एक कर्मचारी था, उसने भी गमले में बीज डाले और उनकी देखभाल करता रहा। वह प्रतिदिन उसमें पानी डालता और खूब देखभाल करता। सभी कर्मचारी जब आते तो बताते कि, "उनका पौधा बड़ा हो गया।" लेकिन मोहन के गमले में कुछ भी नहीं उगा। फिर भी मोहन ने हिम्मत नहीं हारी और उस गमले में बराबर खाद पानी देता रहा।
एक महीने बाद जब समय पूरा हो गया, तब रामसिंह ने सभी को बुलाया। सभी अपने गमले लेकर आये और अपने पौधों को दिखाने लगे। सभी के गमले में पौधे लहरा रहे थे। कोई छोटा तो कोई बड़ा, पर मोहन चुपचाप एक तरफ खाली गमला लिए खड़ा था। सभी उसका मजाक उड़ा रहे थे। रामसिंह जब उसके पास गया और उसने पूछा कि, "तुम्हारे गमले में कुछ नहीं उगा?" तब मोहन ने धीरे से कहा, "साहब! मैं इस गमले में बराबर खाद-पानी डालता रहा, पर गमले में कुछ भी न निकला।"
रामसिंह उसकी ईमानदारी देखकर बहुत खुश हुए और उन्होंने बताया कि, "मैं तुम लोगों की ईमानदारी और नैतिकता की परीक्षा लेना चाह रहा था, इसलिए मैंने सभी को उबले हुए बीज दिए थे। सभी ने बीजों को बदलकर नए बीज गमले में डाल दिए, जिससे गमले मे पौधे निकल आये और तुमने ईमानदारी के साथ अपना कार्य किया, इसलिए तुम्हारे गमले में कोई भी पौधा नहीं निकला।"
रामसिंह को अब ईमानदार व्यक्ति मिल गया था। उसने अपना कारोबार मोहन की देखने करने का निश्चय किया। अन्य सभी कर्मचारी अपनी चालाकी पर पछता रहे थे।

#संस्कार_सन्देश - 
हमें ईमानदारी और नैतिकता के साथ अपने कार्य को करना चाहिए। उसका फल हमें सदैव अच्छा मिलता है।

कहानीकार-
#मृदुला_वर्मा (स०अ०)
प्रा० वि० अमरौधा प्रथम
अमरौधा (कानपुर देहात)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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