73/2026, बाल कहानी- 23 अप्रैल
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 73/2026
*23 अप्रैल 2026 (गुरुवार)*
#बाल_कहानी - #चालाक_लोमड़ी
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किसी जंगल में एक चालाक लोमड़ी रहती थी। जब उसे किसी से कोई काम निकलवाना होता तो वह सबके साथ मीठी-मीठी बातें करती, लेकिन पीठ पीछे चालाकी करने से बाज नहीं आती थी। उसने अपनी इस आदत से पूरे जंगल के जानवरों को परेशान कर रखा था।
जंगल के राजा शेर से वह खूब चापलूसी करती। मीठे शब्दों में बात करके वह राजा को दूसरों के खिलाफ भड़काती और खुद को बहुत अच्छा साबित करती।
एक दिन जंगल का राजा बदल गया। अब लोमड़ी नए राजा की भी उसी तरह चापलूसी करने लगी। उसने पुराने राजा को नजरअन्दाज करना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे उसका अपमान करने लगी।
पुराने राजा को यह सब देखकर बहुत दु:ख हुआ। वह सोचने लगा कि, "क्या कोई इतना स्वार्थी और चापलूस भी हो सकता है?"
उसी जंगल में एक समझदार हिरनी रहती थी। वह लोमड़ी की चालाकियों और चापलूसी भरे व्यवहार से पहले से ही परिचित थी। उसने लोमड़ी को सबक सिखाने की ठान ली।
एक दिन हिरनी ने एक योजना बनाई। उसने जंगल के सभी जानवरों को इकट्ठा किया और लोमड़ी की असलियत सबके सामने बताने का निश्चय किया।
अगले दिन हिरनी ने लोमड़ी से कहा, “तुम तो बहुत बुद्धिमान और सबकी प्रिय हो। क्यों न आज तुम सबके सामने राजा की प्रशंसा करो?”
लोमड़ी खुश हो गई और नए राजा की जमकर तारीफ करने लगी। तभी हिरनी ने पुराने राजा को भी वहाँ बुला लिया।
जैसे ही पुराना राजा सामने आया, हिरनी ने लोमड़ी से कहा,
“अब तुम इनके बारे में भी कुछ अच्छा कहो।”
लोमड़ी घबरा गई। वह कुछ बोल नहीं पायी, क्योंकि उसने पहले उनके बारे में बुरा-भला कहा था। तभी जंगल के बाकी जानवर भी बोल उठे कि, "लोमड़ी सबके सामने कुछ और पीठ पीछे कुछ और बोलती है।"
सच्चाई सामने आते ही नया राजा बहुत नाराज हुआ। उसने लोमड़ी को कड़ी चेतावनी दी और कहा कि, "अब से वह किसी को धोखा नहीं देगी।"
लोमड़ी को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने सब से माफी माँगी और वादा किया कि, "अब वह ईमानदारी से रहेगी।"
संस्कार सन्देश -
चापलूसी और धोखा ज्यादा दिन तक नहीं चलता, सच्चाई एक दिन सामने जरूर आती है।
कहानीकार -
#रुखसार_परवीन (स०अ०)
उच्च प्राथमिक विद्यालय गजपतिपुर
बहराइच (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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