59/2026, बाल कहानी- 07 अप्रैल
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 59/2026
*07 अप्रैल 2026 (मंगलवार)*
#बाल_कहानी - #युद्ध
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दो बच्चे वैभव और अक्षत आपस में बैठे हुए ठण्डी हवा का आनन्द लेते बहुत ही खुश थे।
कुछ देर बाद खेलने लगे ओर साथी भी आ गये। खेल बदल गया ।
दो छोटों के साथ अन्य बड़े बच्चे मिल गए। आँखों में पट्टी बाँधकर पकड़ने का खेल था।
दोनों छोटे हार जाते। सबसे बड़ा चिटिंग करता। नीचे से पट्टी खिसकाकर झाँककर जीत जाता।
छोटे वैभव ने विरोध किया, "तुमने चिटिंग की, तब जीते।अक्षत भी वैभव का साथ देते बोला, "जाओ, हम नहीं खेलते कुट्टी।"
उसी पल बड़े यानि विराट ने स्वार्थ बाण प्रयोग किया और अपनी चाल चल दी।
अक्षत को अकेले में बुलाकर बोला, "वैभव को कुछ नहीं आता। तुम मेरे साथ दोगे तो बड़ा बना दूँगा।"
उस दिन से अक्षत की आँखों में खेल-खेल में जो लालच की पट्टी विराट ने बाँधी, वह कभी न उतरी। उसकी बुद्धि का भी नाश कर हो गया।
इस तरह दो मित्र जो ठण्डी हवा का आनन्द उठा रहे थे। वे आज विराट की शक्ति प्रयोग से आग में झुलसते संग्राम करने लगे।
बरसों बीत गए। अक्षत विराट के भरोसे अन्धी दौड़ में शामिल हो गया।
वैभव भागता हुआ कभी लपट से बचता है, कभी धुँआ-धुँआ होकर आँसू पोंछता है, कभी पड़ोसी से सहायता माँगता कहता है, "काश! मेरा मित्र मुझे फिर मिल जाता। इस विराट के स्वार्थ ने तो मेरा मित्र और अस्तित्व दोनों ही छीनकर आज युद्ध में झोंक दिया है।"
#संस्कार_सन्देश -
हमें स्वार्थभरी मित्रता से सदा बचना चाहिए। यह कभी हितकारी नहीं होती है।
कहानीकार-
#अमितारवि_दुबे (पू०प्रा०)
शासकीय सुखराम नागे महाविद्यालय छिपली
तहसील- नगरी जिला धमतरी
राज्य- छत्तीसगढ़
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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