66/2026, बाल कहानी- 15 अप्रैल
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 66/2026
*15 अप्रैल 2026 (बुधवार)*
#बाल_कहानी - #प्यासी_गिलहरी
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एक दिन विद्यालय में बच्चे पानी पीने के लिए नल के पास गये। नल के पानी से तेज दुर्गन्ध आ रही थी। बच्चे तुरन्त शिक्षिका के पास पहुँचे और बोले, “मैडम! नल के पानी से बदबू आ रही है।”
मैडम ने गम्भीरता से कहा, “जब तक पानी की जाँच नहीं हो जाती, कोई भी बच्चा नल का पानी नहीं पियेगा!” सभी बच्चे उनकी बात मानकर अपनी-अपनी कक्षाओं में वापस चले गये।
उसी समय रसोइया खाना बनाने के लिए नल से पानी ले गयी थी। शिक्षिका तुरन्त वहाँ पहुँचीं और बोलीं, “इस पानी को तुरन्त फेंक दीजिए और साफ पानी का उपयोग कीजिए। जब तक जाँच न हो जाए, कोई भी नल का पानी इस्तेमाल नहीं करेगा।”
रसोइया ने दूसरे स्रोत से साफ पानी लेकर खाना बनाना शुरू कर दिया।
मैडम खुद नल की जाँच करने पहुँचीं। पानी से दुर्गन्ध तो आ रही थी, लेकिन कारण समझ में नहीं आ रहा था। तभी विद्यालय के एक अन्य शिक्षक वहाँ आये और बोले, “लगता है नल के अन्दर कोई जीव मर गया है। नल खोलकर देखना पड़ेगा।”
जब नल का हत्था खोलकर देखा गया, तो उसमें एक मरी हुई गिलहरी मिली। दरअसल, प्यास से व्याकुल होकर गिलहरी नल के हत्थे के रास्ते अन्दर चली गई थी। उसी समय किसी ने नल चला दिया, जिससे वह उसमें फँसकर दब गई और उसकी मृत्यु हो गई।
यह देखकर सभी को बहुत दु:ख हुआ। एक छोटी-सी प्यास ने एक जीव की जान ले ली थी।
इस घटना के बाद विद्यालय के सभी लोगों ने यह निश्चय किया कि अब वे जानवरों और पक्षियों के लिए अलग बर्तनों में पानी भरकर रखेंगे, ताकि कोई भी जीव प्यासा न रहे और इसे असमय मृत्यु का शिकार न होना पड़े।
#संस्कार_सन्देश -
हमें हमेशा जानवरों और पक्षियों के लिए छत या आँगन में पानी रखना चाहिए, ताकि किसी भी जीव की मृत्यु प्यास के कारण न हो।
कहानीकार -
#रुखसार_परवीन (स०अ०)
उच्च प्राथमिक विद्यालय गजपतिपुर, बहराइच (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम#मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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