हमारी शक्ति, हमारा ग्रह
माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः।
हमारी भारतीय परंपरा में पृथ्वी को माँ का स्थान दिया गया है—वह जो बिना किसी अपेक्षा के समस्त जीवों का पालन-पोषण करती है। यह धरा ही जीवन का आधार है, जहाँ हमारा जन्म, कर्म और अंत—सब कुछ होता है।
इस विश्व पृथ्वी दिवस पर आइए हम सब मिलकर संकल्प लें कि अपनी इस जीवनदायिनी धरती को स्वच्छ, हरित और सुरक्षित बनाएँगे। प्रदूषण को कम करेंगे, अधिक से अधिक वृक्ष लगाएंगे और प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने में अपना योगदान देंगे।
जब पृथ्वी सुरक्षित रहेगी, तभी हमारा भविष्य भी सुरक्षित रहेगा।
धरती को अलग-अलग नामों से पुकारा गया है—
यह धरा है क्योंकि यह सबको धारण करती है,
भू है क्योंकि जीवन का आधार है,
वसुंधरा है क्योंकि यह असीम संपदा से भरपूर है,
और अन्नपूर्णा है क्योंकि यह हम सबको अन्न प्रदान करती है।
पौराणिक कथाओं में भी पृथ्वी के महत्व का विशेष वर्णन मिलता है। कहा जाता है कि राजा पृथु ने धरती को समतल बनाकर कृषि योग्य बनाया और प्रजा के लिए अन्न की व्यवस्था की। तभी से यह धरा मानव जीवन के पोषण का मुख्य आधार बनी।
आइए, हम सभी मिलकर इस अमूल्य धरोहर की रक्षा करें और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, हरित और सुंदर पृथ्वी का निर्माण करें।
आप सभी को विश्व पृथ्वी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
रचयिता
प्रतिभा भारद्वाज,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यामिक विद्यालय वीरपुर छबीलगढ़ी,
विकास खण्ड-जवां,
जनपद-अलीगढ़।

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