साल विदा होने को है
समय की अविरल धारा में
ये साल भी विदा होने को है।
यादों में मुस्कान सहेजे
कुछ ख्वाब नया संजोने को है।
शुक्रिया उस ऊपर वाले का
जिसने सब कुछ नियत किया।
शुक्रिया उन अपनों का भी
जिन्होंने हर पल साथ दिया।
शुक्रिया उन बाधाओं का
जिसने हमें मजबूत किया।
उन अपनों का जिसने
अपने होने का सबूत दिया।
शुक्रिया ढलते सूरज का
जो हमें हौसला देता है।
शुक्रिया हर उस अनुभव का
जिसने कुछ सीख दिया।
नववर्ष की नई रश्मियाँ
नव ऊर्जा मुस्कान पिरोए।
थके हारे जो मन हैं उनमें
अपनी नई ताजगी पिरोए।
प्रार्थना है प्रभु से
स्वास्थ्य आपका रहे निरोगी
रहें विचार सदा यूँ उन्नत।
कदम पड़े फिर जहाँ आपके
वहाँ सभी हों और प्रखर।
सोच आपकी रहे यूँ पावन
मानवता का दीप हो उज्जवल।
हम भी बनें सहारा किसी का
साथ बनाए रखिएगा निर्मल।
रचयिता
डॉ0 निशा मौर्या,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय मीरजहांपुर,
विकास खण्ड-कौड़िहार-1,
जनपद-प्रयागराज।

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