214/2025, बाल कहानी- 13 दिसम्बर
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 214/2025
*13 दिसम्बर 2025 (शनिवार)*
#बाल_कहानी- #पुजारी_की_सीख
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एक गाँव में एक शेरसिंह नाम का आदमी रहता था। इसका एक ही काम था कि सवेरे खाना खाने के बाद घर के बाहर बैठ जाता था। और जो भी निकलता था, उससे कुछ न कुछ बात जरूर कहता था। उसी गाँव में रहने वाले विष्णु हर रोज मन्दिर जाते थे।
एक दिन वह सवेरे मन्दिर जा रहे थे। शेरसिंह अपने घर के दरवाजे पर बैठा हुआ था। उनको देखकर शेरसिंह बोल पड़ा, "लगता है, विष्णु आज तो भगवान विष्णु को बुलाकर ही रहेंगे! धरती पर लाकर ही रहेंगे!" ऐसा कहकर शेरसिंह हँसने लगा।" विष्णु उसकी बात अनसुनी कर मन्दिर चले गये। थोड़ी देर के बाद इस गाँव में पढ़ने वाले एक अध्यापक निकले। अध्यापक को देखकर शेरसिंह ने कहा, "ही..ही..ही, लगता है आज तो बच्चे को अधिकारी बनाकर ही आयेगा।"
अध्यापक भी उसकी बात सुनकर चुपचाप अपने स्कूल की तरफ चले गये।
कुछ समय बाद उसी गाँव की एक बुजुर्ग दादी दवा लेने जा रही थी। उनका बेटा उनके साथ था। दादी के बेटे से शेरसिंह ने कहा, "लगता है, आज तो दादी निपट कर ही आएगी। ऐसा कहकर वह फिर हँस दिया।"
क्योंकि दादी का बेटा दादी को दवा दिलाने जा रहा था, इसलिए उसने शेरसिंह से कोई बहस नहीं की। वह चुपचाप चला गया। एक दिन शेरसिंह घर के बाहर बैठा था। तभी मन्दिर के पुजारी उसके घर के सामने से निकले। शेरसिंह ने पुजारी जी से कहा, "पुजारी जी! जिस दिन भगवान मिल जाएँ, मुझे भी मिलवा देना।" पुजारी जी ने जैसे ही शेरसिंह की बात सुनी। उन्होंने शेरसिंह से कहा, "बेटा, शेर सिंह! भगवान से मिलने के लिए खुद मन्दिर में जाना पड़ता है या फिर मृत्यु हो जाने के बाद इन्सान भगवान की शरण में पहुँचता है।"
पुजारी जी की यह बात सुनकर शेरसिंह बौखला गया, "अच्छा, तो तुम कहना चाहते हो कि मैं मर जाऊँ।" पुजारी जी ने उत्तर दिया, "नहीं, शेर सिंह! तुम तो इतने अच्छे इन्सान हो कि हर रोज सभी से कुछ ना कुछ कहते हो, जिससे कि हर इन्सान तुमको जानता है। आदमी अपने कार्यों के लिए जाना जाता है, चाहे वह अच्छे कार्य हों या फिर बुरे।"
शेर सिंह ने पुजारी जी से कहा, "तो क्या मेरे कार्य बुरे हैं?" पुजारी जी ने उत्तर दिया, "अभी मेरे द्वारा कहे गए शब्द तुम्हें कितने बुरे लगे जो कि तुम मुझसे लड़ने लगे। इसी प्रकार तुम हर व्यक्ति से कुछ न कुछ बात बोलते हो। कोई भी व्यक्ति तुमसे हँसकर जवाब नहीं देता है। इसका मतलब यही हुआ कि तुम्हारे वचन किसी को पसन्द नहीं आते हैं।"
पुजारी जी की बात सुनकर शेरसिंह को अपनी गलती समझ में आ गई। उसको एहसास हुआ। उस दिन के बाद उसने किसी भी आने-जाने निकलने वाले व्यक्ति से गलत शब्द नहीं बोले। पुजारी जी ने उसकी आँखें खोल दी थीं। जब तक व्यक्ति को अपनी गलती का एहसास कराया नहीं जाता है, तब तक उसको समझ में नहीं आता है। यही हाल शेरसिंह का था।
#संस्कार_सन्देश -
"जो शब्द हम अपने लिए नहीं सुनना चाहते हैं, वह हमें दूसरों से भी नहीं कहने चाहिए।"
कहानीकार-
#शालिनी (स०अ०)
प्राथमिक विद्यालय कूँड़
विकास खण्ड- करहल
जनपद- मैनपुरी (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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