207/2025, बाल कहानी- 05 दिसम्बर
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 207/2025
*05 दिसम्बर 2025 (शुक्रवार)*
#बाल_कहानी - #परिश्रम_ही_सच्चा_सुख
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सुख क्या है? जिसमें दुख की अनुभूति न हो? नहीं..दु:ख के पश्चात प्राप्त होने वाला आनन्द ही सुख है।” मिस्टर लाल लगातार हॉर्न दे रहे थे।
गार्ड भागकर दरवाज़ा खोलने पहुँचा। अन्दर आते ही उनकी नजर अपने गार्डनर पर पड़ी, जो पास ही एक क्यारी में बैठकर काम कर रहा था। गार्डनर काम कर रहा था और थोड़ी देर के पश्चात वह समय हो जाने के कारण खाना खाने बैठा और एक ईट पर सर रखकर लेट गया।।
उसका नाम राजू था। तभी मिस्टर लाल पुनः उसे देखने पहुँच गए। राजू बोला, “साहब, आप क्यों परेशान हो रहे हैं?”
मिस्टर लाल ने कहा, “तुम यहाँ ईंट पर सिर रखकर क्यों लेटे हो?” राजू हँसते हुए बोला, “अरे साहब! आप टेंशन न लीजिए। हमें तो यहीं आराम मिलता है।”
मिस्टर लाल ने फिर कहा, “नहीं..नहीं, तुम पूरे दिन से पत्थर ढोने का काम कर रहे हो। कम से कम कुछ देर तो चैन से रोटी खाकर आराम कर लो।”
राजू मुस्कराया और बोला, “साहब, अगर हम आराम करने में पड़ गए न, तो हम कभी काम नहीं कर पायेंगे। हमारा तो काम ही मजदूरी करना है। आराम करेंगे तो काम कब करेंगे, साहब? हम तो दो रोटी कमाकर खाते हैं, हैंडपम्प का ठण्डा पानी पीकर मस्त रहते हैं। अगर सब लोग ऐसी और कूलर की ठण्डी हवा खाकर अन्दर सोते रहेंगे, तो ये ऊँची-ऊँची फैक्ट्रियाँ, सुसज्जित बाग-बगीचे और लहलहाते खेत सब नष्ट हो जायेंगे इसलिए आप जाइये, आराम कीजिए। मुझे इसी पत्थर पर सिर रखकर सोने दीजिए साहब! अभी आधा घण्टा बाद उठकर फिर काम करना है।”
इतना कहकर वह आराम से पत्थर पर सिर रखकर सो गया।
मिस्टर लाल बड़ी-बड़ी आँखों से उसे देखते रह गये और फिर गाड़ी उठाकर नींद की दवा लेने डॉक्टर के पास चले गये।
उन्हें राजू को देखकर बस एक ही विचार आ रहा था, “सच्चा सुख कहाँ है? बड़ी-बड़ी गाड़ियों और विशाल बंगलों में… या इन मजदूरों और भोले-भाले, निस्वार्थ लोगों के पास?” जो लगातार परिश्रम करते हैं और सुख की नींद सोते हैं।"
#संस्कार_सन्देश -
हमें स्वस्थ रहने के लिए हमेशा परिश्रम करना चाहिए, तभी बिना दवा के गहरी और आनन्ददायक नींद आती है।
कहानीकार -
#पुष्पा_पाठक (से०नि०शि०)
शां० माध्यमिक शाला,
डेरा पहाड़ी, छतरपुर (म०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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