210/2025, बाल कहानी- 09 दिसम्बर
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 210/2025
*09 दिसम्बर 2025 (मंगलवार)*
#बाल_कहानी- #बी०_एल०_ओ०_अतिथि
------------------------
बेंदा गाँव में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन एस०आई०आर० का कार्य चार दिन से चल रहा है। सहायता के लिए हमारे साथ बेंदा गाँव में नियुक्त लेखपाल कुमार गौरव की ड्यूटी लगाई गयी।इसीलिए कि लेखपाल का गाँव के प्रत्येक घर से जुड़ाव होता है। मूलतः बिहार राज्य के रहने वाले कुमार गौरव लेखपाल साहब विनम्र और हँसमुख स्वभाव के व्यक्ति हैं। साथ में कार्य करने में अनुभव और आनन्द दोनों की प्राप्ति हो रही थी। आज लेखपाल साहब और हमारे बीच तय हुआ कि नदी की तलहटी के किनारे बसे काछी समाज मुहल्ले में जाया जाये और सारा दिन वहीं पर एस०आई०आर० के फॉर्म भरवाये जाये। तीन घण्टे तक स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन का कार्य चला। लगभग नब्बे फॉर्म कम्पलीट हो गये।
वहीं से नदी के रास्ते निकलते हुए वन विभाग के जंगलों के बीच एक महिला मतदाता का घर मिला। उसका घर बिल्कुल नदी की तलहटी से सटा हुआ ऊबड़-खाबड़ रास्तों के बीच पड़ता है। कठिनाईयों का सामना करते हुये हम और लेखपाल साहब पहुँचे। घर घास-फूस छप्पर और आँगन गोबर से लिपा हुआ था। दस से बारह बकरियाँ बँधी हुई थी। महिला मतदाता अवधरानी अपनी नातिन रचना के साथ रहती है। रचना उच्च प्राथमिक विद्यालय बेंदा में कक्षा सातवीं की छात्रा है। वह दादी के साथ यही रहती है। पूरा परिवार जिसमें बेटा, बहू, नाती सभी लोग दिल्ली में रहकर मजदूरी करते हैं। उन लोगों का साल में एक दो बार ही बेंदा गाँव में आना होता है। हम लोगों के लिए आँगन में चारपाई डाल दी गयी, जिसमें रंग-बिरंगा बिछौना पड़ा हुआ था। हम लोग जैसे ही बैठे, रचना अन्दर से पानी से भरे दो लोटा व उसकी दादी टकोरी में गुड़ के दो टुकड़े लेकर आयी। उन्होनें कहा कि, "हमारे गाँव का अतिथि भगवान होता है। पहले आप ये गुड़ खाइये, इसके बाद जल लीजिए। फिर एस० आई० आर० फॉर्म.....
हम लोगों को लगा कि इस गाँव के लोग पैसे से जरूर गरीब हो सकते है, लेकिन दिल के बहुत ही अमीर है। तभी वहाँ बेंदा प्रधान प्रतिनिधि शैलेन्द्र राजपूत आ गये। उन्होनें बताया कि, "बी० एल० लो० साहब अतिथि का सत्कार व सम्मान तो बेंदा गाँव की पूर्वजों से परम्परा रही है। ये गाँव के सभी लोग जानते है कि घर आये मेहमान का सत्कार और सम्मान उसी तरह करना चाहिए, जैसे ईश्वर का करते हैं। यह परम्परा हमें मेहमानों के प्रति विनम्रता, स्नेह और कृतज्ञता सिखाती है और इसे "अतिथि यज्ञ" का हिस्सा माना जाता है।"
हम दोनों उस परिवार का ऐसा भाव देखकर कृतज्ञता से भर गये और सोचने लगे कि मानवता आज भी ईश्वर के रुप में कई लोगों में विद्यमान है।
#संस्कार_सन्देश-
प्यारे बच्चों! अतिथि देवो भव! भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण सिद्धान्त है, जिसका अर्थ है अतिथि भगवान के समान होता है। अतिथि का आदर करना एक पवित्र कर्तव्य है।
कहानीकार-
#मिथुन_भारती (स०अ०)
प्राथमिक विद्यालय बौखर
वि०क्षे० सरीला, जनपद- हमीरपुर (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
Comments
Post a Comment