218/2025, बाल कहानी- 18 दिसम्बर

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 218/2025
*18 दिसम्बर 2025 (गुरुवार)*
#बाल_कहानी - #उतौव
---------------------

"भौतै उतौव छु मासाप तो, कैकी नै मानुन। जरा डरा बेर बारबरि में धरि दिया तै।" नामाँकन हेतु स्कूल में लाते ही राहुल की माँ प्रधानाध्यापक कठायत जी से पास में रखी कुर्सी पर राहुल को धर तथा उनकी टेबल पर उसका आधार कार्ड व जन्म प्रमाण-पत्र रखते हुए बोली, जैसे कि बच्चे का दाखिला पढ़ने के लिए कम, उसकी आदतें सुधारने के मकसद से अधिक किया जा रहा हो। 
"नै -नै तुमि चिन्ता न करो, इस्कूल में सब सुधरि जानान् , बस रोज भेजिया तै।"  
"आम्-बुब बिगाड़ि दिनान् नानतिनन् , अति लाड़ लै भल जै कि हुं, आगनबाड़ी में लै रूनेरै नै भय, नानतिनन् चिंगरि दिनेर भ्यो वाँ" कहते हुए राहुल की माँ जैसे अपने दिल का दर्द बयां कर रही हो। बाल वाटिका में एडमिशन हेतु आवश्यक कार्यवाही कर "बस आब् तै सुधारण हमर काम छु" कहते हुए कठायत जी ने उन्हें ढाढस बँधाते हुए जाने का इशारा कर दिया। 
जैसे ही कागजों को पकड़ वह जाने को तैयार हुई, राहुल कुर्सी से कूदकर माँ के आगे हो लिया और घर के लिए चलने लगा। "नै-नै तु यै है रौ, पछिल छुट्टी बाद आए।" कहकर माँ उसे अन्य बच्चों के साथ बिठाने का प्रयास करने लगी। परन्तु वह कहाँ? अब दहाड़ें मार-मारकर रोने लगा तथा साथ जाने की जिद करते हुए हाथ पैर पटकने लगा। "मैसाप यसै छु पै यो, उर्धैगी। कि करूँ? येल भौत पिता हाल्याँ।" "अ रे-ओ हो राहुल तो भौत अच्छा बच्चा है, ये ले खा- शाब्बाश" कहते हुए मास्साब ने टाफी उसे देते हुए लुभाने का प्रयास किया और एक खिलौना देकर चुप कराते हुए कनखियों से उसकी माँ को जाने का इशारा कर दिया। 
उसने खिलौने को नोच-नोचकर टुकड़े-टुकड़े कर दिया, तभी माँ को ढूँढने लगा। माँ को न पाकर पुनः रोना शुरू कर दिया। "चुप हो जा-चुप हो जा " कहते हुए मैडम ने भी उसे टाफी देनी चाही तो उसने उनके हाथ में दाँत से काट दिया। "उई" कहते हुए झट से मैडम ने हाथ खींच लिया। अन्य बच्चे उसकी हरकतों से हतप्रभ थे। शायद सोच रहे हों कि ऐसा बच्चा आज ही देखा, जिसने खिलौना नोंचकर मैडम को दाँत से काटने का साहस किया है। "चुपचाप बैठ जा..।" झटके से बड़ी आवाज में मास्साब बोल पड़े। अकस्मात् डाँट की आवाज का असर ऐसा हुआ कि वह चुप हो गया और चुपचाप सिस्कियाँ लेने लगा और धीरे-धीरे चुप हो गया तथा मैडम द्वारा दी गई टाफी खाने लगा। बीच-बीच में अन्य बच्चों पर भी उड़ती नजर डालता और झटके से सिर नीचे कर नोंचे गए खिलौने के टुकड़ों को समेटने लगता। भोजनावकाश में कठायत जी ने उसे गोद में पकड़ लाइन में बिठा खाना खिलाया और पुनः खाने के लिए बिस्कुट दिया। वह शनैः-शनैः सामान्य सा हो गया।
अगले दिन उसकी माँ गेट तक उसे पहुँचा अन्य परिचित बालक के साथ स्कूल में भेज वापस लौट गयीं। 
कुछ दिन बाद वह खुशी-खुशी अन्य बच्चों के साथ विद्यालय आने-जाने लगा। पढ़ाई के साथ ही वह अन्य गतिविधियों में भी अब अग्रसर रहने लगा। आगे की कक्षाओं में उसकी तीव्र क्रियाशीलता तथा शिक्षकों के उचित मार्गदर्शन ने उसे हर क्षेत्र में आगे रहने वाले विलक्षण बालक के तौर पर प्रसिद्ध कर दिया। वह ब्लॉक, जिला एवं राज्य स्तर तक अनेक प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर अपनी योग्यता का लोहा मनवा चुका था। 
आज कक्षा पाँच की परीक्षा उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ उत्तीर्ण कर जब उसकी माँ अगली कक्षा में भर्ती करने हेतु राहुल की टी०सी० व अंक पत्र लेने विद्यालय आयीं तो उनके होंठो पर बार-बार विद्यालय स्टाफ के लिए आभार प्रकटीकरण के ही शब्द प्रस्फुटित हो रहे थे। बच्चे के कागजाद देते हुए प्रधानाध्यापक की मायूस आँखे व डबडबाए उसकी माँ के नयन बहुत कुछ बयां कर रहे थे। राहुल सर, मेंम लोगों को प्रणाम करते हुए कठायत जी को नमन करने हेतु झुका ही था कि मास्साब ने उसे गले से लगा दिया और दोनों ओर से अब आँसू की झड़ी बह निकली और उनके मुँह से निकल उठा, "मेरा उतौव बच्चा- राहुल।"

#संस्कार_सन्देश -
बच्चों को प्रेम से समझाकर सब कुछ पढ़ाया-सिखाया जा सकता है।

कहानीकार-
#दीवान_सिंह_कठायत (प्र०अ०)
रा० आ० प्रा० वि० उडियारी (बेरीनाग) पिथौरागढ

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

Comments

Total Pageviews