समय का पहिया: एक विदाई, एक आगाज़

बीत रहा है साल पुराना, यादें अपनी छोड़ चला,

खट्टी-मीठी बातों का वो, सुंदर दर्पण तोड़ चला।


जो खोया उसका गम कैसा, जो पाया वह अनमोल रहा,

अनुभव की इस नई पोटली, का अपना ही मोल रहा।


​वक्त की धारा बहती जाती, रुकना उसका काम नहीं,

सूरज फिर से उगने को है, डगर यहाँ विश्राम नहीं।


आने वाले कल की चौखट, नए सवेरे सजा रही,

खुशियों की इक नई गूँज अब, हर आँगन में बजा रही।


​आओ मिलकर हाथ बढ़ाएँ, नफरत को अब दूर करें,

सपनों के ऊँचे अंबर पर, उम्मीदों को नूर करें।


लक्ष्य हमारे स्पष्ट रहें और, मन में अडिग विश्वास रहे,

मानवता का दीप जले और प्रेम सदा ही पास रहे।


​नया साल यह नई रोशनी, सबके जीवन में लाए,

दुख के बादल छँटें सभी और सुख की खुशबू महकाए।


कदम मिलाकर चलें निरंतर, नई कहानी लिखनी है,

आने वाले स्वर्णिम युग की, अब पहचान परखनी है।


रचयिता

डॉ0 शालिनी गुप्ता,

सहायक अध्यापक,

कंपोजिट विद्यालय मुर्धवा,

विकास खण्ड-म्योरपुर, 

जनपद-सोनभद्र।



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