211/2025, बाल कहानी- 10 दिसम्बर
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 211/2025
*10 दिसम्बर 2025 (बुधवार)*
#बाल_कहानी - #जीवन_की_किताब
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रोहन एक उत्साही और सीखने वाला लड़का था, लेकिन वह हमेशा जल्दी से परिणाम चाहता था। एक दिन उसके दादाजी ने उसे अपनी पुरानी डायरी दिखायी और कहा, "रोहन! यह जिन्दगी की किताब की तरह है।"
रोहन ने पूछा, "इसका क्या मतलब दादाजी?"
दादाजी मुस्कुराए और बोले, "देखो, इस डायरी में कुछ पन्ने बहुत खुशी के हैं- जब मैंने पहली नौकरी पायी थी तो कुछ पन्ने चुनौतियों के थे। जब मुझे व्यापार में घाटा हुआ था। लेकिन हर पन्ने के अन्त में एक सीख लिखी है।"
रोहन ने पहला पन्ना पढ़ा, "कड़ी मेहनत का फल मीठा होता है, पर उसके लिए धीरज रखना पड़ता है।"
फिर उसने एक दुखद पन्ना पढ़ा, जहाँ असफलता का ज़िक्र था। उसके नीचे लिखा था- "असफलता अन्त नहीं है, यह बस तरीका है, जो काम नहीं आया। अब नया रास्ता खोजो।"
दादाजी ने समझाया, "बेटा! तुम्हारी जिन्दगी भी ऐसी ही किताब है, जब तुम अपनी साइकिल से गिरते हो (एक पन्ना), तो तुम सीखते हो कि अगली बार ब्रेक कैसे लगाना है (सीख)। जब तुम परीक्षा में अच्छे अंक लाते हो (एक पन्ना), तो तुम सीखते हो कि ध्यान लगाकर पढ़ना कितना ज़रूरी है (सीख)। हर पन्ना जरूरी है, चाहे वह तुम्हें खुशी दे या दर्द। हमें बस हर पन्ने को ध्यान से पढ़ना है और उससे कुछ सीखकर अगले पन्ने (आने वाले कल) को बेहतर बनाना है।"
रोहन को यह बात समझ आ गयी। उसने फैसला किया कि अब वह अपनी जिन्दगी के हर अनुभव को एक मूल्यवान सबक मानेगा और पुरानी गलतियों को दोहराने के बजाय, उनसे सीखकर आगे बढ़ेगा।
#संस्कार_सन्देश -
हमें जीवन में पुस्तकों और हर जगह से सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
कहानीकार-
#नरेन्द्र_नाथ_पटेल
कम्पोजिट विद्यालय सुरहन, भदोही (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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