212/2025, बाल कहानी- 11 दिसम्बर
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 212
*11 दिसम्बर 2025 (गुरुवार)*
#बाल_कहानी - #दिन_जनम_का
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"नहीं पापा! मुझे आज जरूर जाना है वहाँ। सुना है मन्त्री जी आ रहे हैं कार्यक्रम में? कितना अच्छा होगा कि मैं वहाँ भी प्रथम आऊँ और उनके हाथों से इनाम पाऊँ। आपको भी अच्छा लगेगा न?" सुदूर गाँव खाँकरी स्थित जूनियर हाईस्कूल में कक्षा आठ में पढ़ रहा गोविन्द आज होने वाले जिला स्तरीय सामाजिक-विज्ञान भाषण प्रतियोगिता में जाने के लिए पिता को मनाता हुआ तड़के चार बजे ही बिस्तर छोड़ कर महरा सर के साथ जिला मुख्यालय जाने के लिए उन्हें राजी करने लगा।
पिता चाह रहे थे कि आज गोविन्द का जन्म दिन है, अतः वह घर पर ही रहे ताकि शाम को जल्दी-जल्दी जन्म-दिन मनाने आने वाले आस-पड़ोस के बच्चों को बर्थडे की औपचारिकताओं से निपटाकर शीघ्र उजाले में ही उनके घरों को भेजा जा सके। विगत दो माह से उनके गाँव व आसपास के क्षेत्रों में गुलदार का भारी आतंक छाया हुआ था, जिससे लोग खौफ के साये में जी रहे थे। इधर पहाड़ी गाँवों में जंगली जानवरों का आतंक कुछ वर्षों से अब ज्यादा ही छाने लगा था। सुबह-सुबह जाने से उसके पिता व चाचा भी उन्हें छोड़ने छ: किमी० दूर सड़क तक आये और साढ़े छ: बजे जाने वाली पहली जीप से जिला मुख्यालय की ओर उन्हें भेज वापस गाँव लौट आये।
जब से महरा सर स्कूल में आये थे, तब से ही मानो स्कूल में रौनक-सी छा गयी थी। बहु प्रतिभाशाली व समर्पित शिक्षक महरा सर बच्चों को हर क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए तमाम तरह की नवाचारी गतिविधियों के साथ-साथ अतिरिक्त समय देकर पढ़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते, जिसका अब परिणाम दिखाई देने लगा था।
इस वर्ष उनके विद्यालय का होनहार छात्र गोविन्द भाषण प्रतियोगिता में ब्लॉक स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त कर आज जिले में पहली बार प्रतिभाग कर रहा था।
नियत समय पर प्रतियोगिता प्रारम्भ हुई। महरा सर के उचित दिशा-निर्देशन व पूर्व तैयारियों ने गोविन्द को खूब तराशा था। ऊपर से उसके उच्च मनोबल, सटीक भाषण-शैली व वाक-पटुता ने सभी को हैरान कर दिया। मुख्य अतिथि के रूप में विराजमान मन्त्री महोदय उसके प्रदर्शन से अत्यन्त प्रभावित हुए और जिले में भी उसके प्रथम स्थान पर रहने की घोषणा के उपरान्त उसे मिलने को कहा। मन्त्री जी बोले, "बेटा! तुम्हारे प्रदर्शन से मैं काफी प्रभावित हुआ, मैं तुम्हारे लिए कुछ करना चाहता हूँ। बोलो.. क्या कर सकता हूँ?" मानो गोविन्द इस क्षण की तलाश में हो वह तुरन्त बोला, "सर! हमारा गाँव काफी दुर्गम क्षेत्र में है, अभी तक भी सड़क मार्ग से नहीं जुड़ पाया। आप कृपा कर हमें सड़क सुविधा से आच्छादित कर दीजिए। मैं आजीवन आपका आभारी रहूँगा।" मन्त्री महोदय ने निकट बैठे अधिकारियों को शीघ्र खाँकरी को सड़क मार्ग से जोड़ने की कार्यवाही का आदेश जारी करते हुए गोविन्द की पीठ थपथपाई और उसे चमचमाता हुआ शानदार स्मृति चिह्न प्रदान किया। प्रथम स्थान पाने की सूचना फोन पर परिवार व गाँव में भी पहुँच चुकी थी।
कार्यक्रम में समय अधिक लगने व रात्रि में गुलदार के भय से आज वह और महरा सर जिला मुख्यालय में ही रुक गये। दूसरे दिन गाँव पहुँचने पर लोगों ने दोनों का भव्य स्वागत किया। तभी जन्म-दिन पर घर पर न रहने के लिए गोविन्द साथियों से माफी माँगने लगा तो गाँव वाले बोले, "अरे बेटा ! तूने तो मन्त्री जी से सड़क माँगकर अपना दिन जनम का अनमोल कर दिया। जो काम बरसों से हम नहीं कर पायो, वह तूने कर दिखाया। तू तो हीरा है रे हीरा।" गोविन्द गौरव का भाव लिए पिता की ओर देखने लगा। उसके पिताजी ने उसे हर्ष में भरकर गले से लगा दिया।
#संस्कार_सन्देश -
हमारा सच्चा त्योहार और जन्म-दिन तभी सफल होता है, जब उस दिन हम प्राणियों के कल्याण के लिए कोई कार्य करें।
कहानीकार-
#दीवान_सिंह_कठायत (प्र०अ०)
रा० आ० प्रा०वि० उडियारी (बेरीनाग)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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