209/2025, बाल कहानी- 08 दिसम्बर

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 209/2025
*08 दिसम्बर 2025 (सोमवार)*
 #बाल_कहानी - #पशुता
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पशुओं के साथ जीवन जीकर अपनी दिनचर्या को संयमित ढंग से जीते हुए, जखोली गाँव के जीत सिंह जेठारा सदैव से गाँव समाज में नेक व जिन्दा-दिल इन्सान के रूप में जाने जाते रहे। दो जोड़ी बैल, तीन भैस, चार गायें व बारह बकरियों से भरी हुई उनकी गौशाला में सदैव खूब चहल-पहल बनी रहती। रम्भाती हुई गाय-भैसें, मिमियाती बकरियाँ व हरपल भौंकते हुए तिब्बती नस्ल के दो कुत्ते, कभी खौफनाक तो कभी मधुर धुनों के मिश्रित संगीत का पल-पल एहसास सभी को कराते रहते।
चारों पुत्रों का विवाह समय से कराकर चार बहुओं और लगभग दर्जन भर पोते-पोतियों से भरा-पूरा उनका परिवार किसी समृद्ध पहाड़ी जमीदार की ठसक बनाए रखने के लिए पर्याप्त था। 
पशुपालन और कृषि के साथ-साथ गाँव में उनकी दुकान पर रोजमर्रा के जरूरत की सारी चीजें लोगों को उपलब्ध हो जातीं। लोग उन्हें सौकारसाप (साहूकार साहब) कहकर भी पुकारते। 
दो फौजी पुत्र, एक दुकान पर और एक पुत्र द्वारा कृषि कार्य की देख-रेख करते हुए पूरी धमक के साथ संयुक्त परिवार में जीते हुए जीत सिंह जेठारा ने अन्तिम क्षणों तक पूरे ठाठ-बाट से जीवन जीया। लम्बी उम्र का सुख पाते हुए इकानवे वर्ष की आयु में उनका देहान्त हुआ था। 
पशुओं से भरपूर कृषक‌ परिवार में सभी लोग जीत सिंह जेठारा, जो परिवार में सबसे सयाने थे, का सदैव सम्मान करते रहे और उनकी बातों का पालन करते रहे, लेकिन उनकी मृत्यु के पश्चात् चारों पुत्र अब अपने-अपने परिवार के साथ अलग हो गये। खेत मकान के साथ ही पशुओं का भी विभाजन कर दिया गया। फौजी पुत्र अपने बच्चों को अपने साथ लेकर चले और बाहर ही बस गये। गाँव में रहने वाले पुत्रों ने भी पशुपालन व कृषि कार्य सीमित कर रोजगार के अन्य धन्धों को अपना लिया। 
गाँव में सड़क आ चुकी थी। विकास के नाम पर अन्दाज व रीति-रिवाज भी बदलने लगे थे अब। भाइयों में भी पहले जैसा व्यवहार भी नहीं रहा था। यदा-कदा पैतृक सम्पत्ति के कारण उनमें टक्कर होती रहती। लोग कहने लगे, जब तक जीत सिंह जीवित रहे, खूब पशुपालन करते रहे, परन्तु मानवता झलकती रही वहाँ। मगर जीत सिंह के जाने के बाद पशु तो काफी कम हो गये लेकिन पशुता बढ़ गई है अब उस परिवार में। यह कहकर उनका मजाक उड़ाया जाने लगा था अब।

#संस्कार_सन्देश -
हमें अपने पुरखों की आन-बान और शान बनाये रखने का भरसक प्रयास करना चाहिए। 

कहानीकार-
#दीवान_सिंह_कठायत (प्र०अ०) 
रा० आ०प्रा० वि० उडियारी बेरीनाग (पिथौरागढ)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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