226/2025, बाल कहानी- 30 दिसम्बर

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 226/2025
*30 दिसम्बर 2025 (मंगलवार)*
#बाल_कहानी - #कर्मों_का_फल
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एक बार की बात है। किसी गाँव में केशव नाम का एक व्यापारी रहता था। व्यापार के सिलसिले में उसे अक्सर बाहर जाना पड़ता था। उसके तीन पुत्र थे-रवि, किशन और श्याम। दुर्भाग्यवश एक दिन बीमारी के कारण उसकी पत्नी का निधन हो गया। बच्चों के पालन-पोषण के लिए केशव ने दूसरा विवाह कर लिया।
नई पत्नी अत्यन्त दुष्ट स्वभाव की थी। वह तीनों बच्चों पर बहुत अत्याचार करती थी। कई-कई दिनों तक उन्हें भूखा रखती और मारती-पीटती थी। बच्चे उसके व्यवहार से बहुत परेशान रहते थे। केशव व्यापार के कारण कई दिनों तक घर से बाहर रहता, जिससे सौतेली माँ अपनी मनमानी करती रहती थी।
सौतेली माँ बच्चों को इतना डरा-धमका कर रखती थी कि वे अपने पिता से शिकायत करने का साहस भी नहीं कर पाते थे। यदि कभी केशव कुछ पूछता, तो वह उलटे बच्चों पर ही झूठे आरोप लगा देती कि ये तीनों मुझे बहुत तंग करते हैं।
कुछ समय बाद सौतेली माँ ने एक बेटी को जन्म दिया। उसका नाम अनोखी रखा गया। वह अपने नाम की तरह ही अनोखी थी। रंग-रूप में वह सुन्दर नहीं थी, लेकिन माँ के लिए वह किसी परी से कम नहीं थी। सौतेली माँ अपनी बेटी को बहुत प्यार करती और सौतेले बच्चों को और अधिक सताने लगी।
चालाकी से उसने सारी सम्पत्ति अपनी बेटी के नाम करा ली। कुछ समय बाद एक दिन अचानक सड़क दुर्घटना में केशव की मृत्यु हो गई।
केशव की मृत्यु के बाद सौतेली माँ ने तीनों बच्चों को घर से बाहर निकाल दिया। बच्चों को उनके मामा अपने साथ ले गये। उन्होंने उन्हें पढ़ाया-लिखाया और योग्य इन्सान बनाया।
उधर सौतेली माँ ने अपनी बेटी अनोखी का विवाह गाँव के ही एक युवक राकेश से कर दिया। राकेश और उसका परिवार बहुत लालची था। वे सम्पत्ति के लालच में अनोखी से विवाह करने को तैयार हो गए। विवाह के कुछ दिनों तक सब ठीक रहा, लेकिन बाद में ससुराल वालों को सौतेली माँ खटकने लगी। वे उसे घर से बाहर निकालकर सारी सम्पत्ति पर कब्जा करना चाहते थे।
कहते हैं न, जैसे कर्म होते हैं, वैसा ही फल मिलता है।
एक दिन अनोखी के ससुराल वालों ने सौतेली माँ पर चोरी का झूठा आरोप लगाकर उसे घर से निकाल दिया। उसके नाम कोई सम्पत्ति नहीं थी, इसलिए वह बेघर हो गई।
जब यह बात उसके सौतेले पुत्रों को पता चली, तो उनसे रहा नहीं गया। वे तीनों उसे अपने साथ ले आये। उसे रहने की जगह दी और भोजन का प्रबन्ध किया। यह देखकर सौतेली माँ को अपने किए पर गहरा पछतावा हुआ। उसे अपने कर्मों की सजा मिल चुकी थी।

#संस्कार_सन्देश - 
मनुष्य को अपने कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है, इसलिए हमें सदैव अच्छे कर्म करने चाहिए।

कहानीकार
#रुख़सार_परवीन (स०अ०)
बहराइच, उत्तर प्रदेश

✏️संकलन 
📝टीम#मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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