204/2025, बाल कहानी- 02 दिसम्बर

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 204/2025
*02 दिसम्बर 2025 (मंगलवार)*
#बाल_कहानी - #चालाक_सियार
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दो सियार मंटू और चंटू गहरे दोस्त थे । मंटू की दोस्ती सच्ची थी, इसलिए वह जो कुछ भी करता, अपने दोस्त का ख्याल रखते हुए ही करता। 
जबकि चंटू नाम के अनुरूप ही चंट चालाक था। वह दोस्ती का दिखावा तो बहुत करता लेकिन मौका देखते ही फायदा उठाने से बाज न आता।
एक बार दोनों दोस्तों ने तय किया कि बहुत ज्यादा ठण्ड शुरू होने से पहले ही हम खाना इकठ्ठा कर लेते हैं, जिससे कड़ाके की सर्दी में खाने के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा।
यह तय होने के बाद दोनों दोस्त सारा दिन शिकार तलाश करते और शाम को एक जगह पर लाकर रख लेते।
दो तीन बाद उन्होंने विचार किया कि यूँ खुले में खाना रखा रहेगा तो कोई भी जानवर चोरी कर सकता है, इसलिए इसे छुपाकर रखना चाहिए।
चंटू ने अपना चालाक दिमाग लगाया और बोला, "ऐसा करते हैं, जो टीले पर एक माँद है, उसके दो हिस्से हैं, पीछे के हिस्से में मैं अपना खाना रखूँगा और आगे के हिस्से में तुम अपना खाना रख लेना और फिर सर्दी में उसी में आराम से पड़े रहेंगे।"
चंटू ने मन ही मन सोचा कि, "क्योंकि इसका खाना बाहर की तरफ होगा, इसलिए आते-जाते मैं उस पर भी हाथ साफ करता रहूँगा और इस तरह मेरा खाना ज्यादा दिनों तक चलेगा।" मंटू भोला था इसके लिए सहर्ष तैयार हो गया।
उन दोनों ने महीने भर की मेहनत से अगले एक महीने के खाने का अच्छा इंतजाम कर लिया और स्वतन्त्र हो गए।
जब कड़ाके की सर्दी पड़ने लगी तो उन्होंने माँद का मुँह अन्दर से बन्द कर लिया और सर्दी में आराम से दिन कटने लगे।
एक दिन सवेरे सवेरे चंटू रोता हुआ मंटू के पास आया और बोला, "अरे यार! मैं तो लुट गया बर्बाद हो गया।"
मंटू आंखें फैलाकर बोला" पर कैसे, क्या हुआ?"
"अरे मेरा सारा खाना किसी ने चुरा लिया, माँद के उस पार से किसी ने सेंध लगा दी और धीरे-धीरे वह खाना चुराता रहा। अब मेरे पास खाने को कुछ भी नहीं है।"
मंटू को बड़ा दुःख हुआ। वह बोला, "कोई बात नहीं.. सर्दी बस कुछ ही दिनों की बची है, तब तक तुम मेरे साथ रहो और इसी में से खाओ, जब तक यह सब खत्म होगा, ठंड भी कम हो चुकी होगी तो हम दोनों फिर शिकार पर निकलेंगे और खाने का इन्तजाम कर लेंगे। मेरे रहते तुम्हें उदास होने की जरूरत नहीं है।"
चंटू को आज पहली बार अपने आप पर ग्लानि हुई कि, "मैं अपने ऐसे हीरे से दोस्त के साथ भी हमेशा चालाकी करता रहा और यह कितना दयालु है। अपने से पहले मेरे लिए सोचता है।" उस दिन से चंटू ने मंटू के साथ किसी भी तरह की चालाकी करना छोड़ दिया। अब वह जो भी करता, मंटू की भलाई के लिए ही करता था। अब ये दोस्ती जानवरों के लिए मिसाल बन चुकी थी।

#संस्कार_सन्देश - 
हमें अपने शुभ चिन्तकों के साथ कभी भी चालाकी/ बेईमानी नहीं करनी चाहिए।

कहानीकार-
#पूनम_सारस्वत 'प्रज्ञा' (स०अ०)
एकीकृत विद्यालय रुपानगला, खैर, अलीगढ़ (उ०प्र०)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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