205/2025, बाल कहानी- 03 दिसम्बर

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 205/2025
*03 दिसम्बर 2025 (बुधवार)*
#बाल_कहानी - #घर_की_वापसी
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एक गाँव में एक जीवन लाल नाम का ब्यक्ति था। वह बहुत गरीब था। उसके चार बेटे थे- जीवन लाल और उसकी पत्नी सहोदरा दोनों ने अपने पुत्रों को पढ़ाया-लिखाया और नौकरी प्राप्त करने के काबिल बनाया। गाँव शहर से बहुत दूर था। जीवन लाल के चारों पुत्र एक दिन अपने माता-पिता से शहर जाने और नौकरी ढूँढने की बात कही | पिता ने शुरू में मना किया। फिर सोचा कि बच्चे पढ़े लिखे हैं तो इनको काम की तलाश में जाना चाहिए। फिर पिता ने कहा, "ठीक है, चले जाना लेकिन जब तक काम नहीं मिलेगा तब तक वापस घर मत आना।" चारों पुत्र ने 'हाँ' कहा और माता-पिता ने आज्ञा लेकर काम की तलाश में शहर चले गए।
शहर पहुँचकर चारों एक जगह बैठे और बोले, "जिसे काम मिलेगा, वह यही पर हर शाम को इन्तजार करेगा। जब तक सबको काम नहीं मिलेगा, कोई घर नहीं जायेगा। इस तरह सभी वहाँ विचार करके अलग-अलग हो गये और काम की तलाश करने लगे। 
सबसे बड़े दीपक को जल्दी ही एक दफ्तर में काम मिल गया। और दीपक से छोटे मोहन को भी एक आफिस में काम मिल गया। वह दोनों रोज शाम को उस जगह आकर ठहरते और अपने भाईयों का इन्तजार करते थे। इस तरह से एक महिना बीत गया। उसके बाद सँझले भाई सोहन को भी कुछ दिन बाद नौकरी मिल गयी। अब वे तीनों भाई हर शाम को उस जगह पर आकर इन्तजार करने लगे। चौथे भाई रोहन को नौकरी नहीं मिली था। वह प्रतिदिन नौकरी की तलाश में शहर में भटकता रहता था। इस तरह से दो महीने बीत गए। तीसरे महीने की पहली सप्ताह को रोहन को भी एक आफिस में कम्प्यूटर आपरेटर का काम मिल गया। अब शाम को रोहन उसी जगह पर गया, जहाँ से अलग हुए थे। वहाँ तीनों भाई पहले से बैठे हुए थे। उनको देखकर रोहन बहुत खुश हुआ। सभी चारों भाई एक-दूसरे को देखकर फूले नहीं समा रहे थे। सब बहुत खुश थे। अपने नौकरी पर एक महीने काम करने के बाद सभी भाईयों ने सोचा कि एक बार माता-पिता को देखने घर वापसी किया जाए और माता-पिता को अपने साथ शहर लाया जाए। चारों ने घर वापसी के लिए अपने-अपने बड़े साहब को छुट्टी के लिए आवेदन दिया और बोले कि, "माता-पिता गाँव में रहते हैं, उन्हें हम शहर लाना चाहते हैं इसलिए हमें कुछ दिन की छुट्टी दें।" सबके बड़े साहब ने उनको छुट्टी दे दी और जल्दी वापस आने को कहा।
चारों भाई अब घर वापसी के लिए तैयार होने लगे और शहर से कुछ समान भी माता-पिता के लिए खरीदा। इस तरह सभी अब घर वापसी के लिए बस स्टैंड पर चले गये। इधर माता-पिता चारों पुत्रों की राह देख रहे थे कि कब आएँगे। माता-पिता बहुत उदास रहने लगे थे। बस का सफर तीन दिनों का होता है। चारों पुत्र तीन दिन बाद घर पहुँच गये। माता-पिता अपने बच्चों को देखकर बहुत खुश हुए और उनकी उदासी खुशी में बदल गई।
चारों पुत्रों ने अपने माता-पिता को अपनी आप-बीती सुनायी और नौकरी पाने का शुभ समाचार सुनाया। माता-पिता बहुत खुश हुए। अपने पुत्रों की घर वापसी पर उनके माता-पिता ने गाँव में भण्डारा कराया और अपनी खुशियाँ बाँटी। गाँव के सभी लोग बहुत खुश थे और नौकरी मिलने पर सभी ने उनके पुत्रों को आशीर्वाद दिया।
एक सप्ताह घर में रूकने के पश्चात चारों पुत्र अपने माता-पिता को लेकर शहर वापस आ गये और अपने-अपने काम में लग गए। चारों पुत्रों के बड़े साहब उनकी जल्दी शहर वापसी पर बहुत खुश हुए और समय आने पर उनका वेतन भी बढ़ा दिया।

#संस्कार_सन्देश -
वापसी का आनन्द बहुत सुखद होता है। चाहे घर वापसी का हो या फिर काम पर वापसी का हो, प्रसन्नता बहुत होती है।

कहानीकार-
#प्रेमलाल_किशन (स०अ०)
शासकीय प्राथमिक विद्यालय बुढ़नपुर, गहरीनमुड़ा, विकास खंड व जिला-सक्ती (छत्तीसगढ़) 

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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