223/2025, बाल कहानी- 24 दिसम्बर

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 223/2025
*24 दिसम्बर 2025 (बुधवार)*
#बाल_कहानी - #रानी_के_फूल
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रानी के छोटे बगीचे में सुन्दर सुन्दर फूल खिले थे। रानी की दीदी उन फूलों में रोज पानी डालती थी। पर रानी पानी डालना तो दूर रहा, एक-दो फूल तोड़कर रोज बिखेर देती। ऐसा करने से उसे आनन्द मिलता था।एक बार रानी रात को सो रही थी, तभी उसे सपना आया कि वह एक जंगल में खो गयी और वह माँ, बाबा, दीदी करके चिल्ला रही है। पर उसे कोई नहीं दिखाई दे रहा। तभी रानी ने देखा कि उसके बाग के वही सुन्दर फूल वहाँ पर है। वे सभी रानी पर हँस रहे हैं। रानी ने उनसे कहा कि, "मुझे मेरे घर पहुँचा दो।" तब एक फूल ने कहा, "क्यों? जब तुम हमारे फूल भाई-बहनों को तोड़कर मसल देती हो, क्या हमें दुख नहीं होता? अब तुम भी देखो, बिना माता-पिता, भाई-बहनों के कैसा लगता है?"
यह सुनकर रानी जोर-जोर से रोने लगी, "प्यारे फूल! भाई-बहनों! मुझे माफ़ कर दो। अब मैं कभी भी तुम्हें नहीं तोडूँगी। तुम्हें खूब पानी, मिट्टी और खाद दूँगी। इतने में रानी की आँख खुल गई। उसने बाहर आकर देखा कि फूल चुपचाप हैं।वो तो सपने में बोल रहे थे। बस! रानी ने तुरन्त पानी की बाल्टी पकड़ी और प्यार से उन्हें पानी देने लगी। उसने देखा कि सारे फूल खुश होकर हवा के झोंकों में झुमने लगे। अब रानी कभी फूल नहीं छोड़ती थी। 

#संस्कार_सन्देश -
फूल प्रकृति का एक सुन्दर उपहार है। फूलों को तोड़ने से उन्हें दर्द होता है, जैसे हमें होता है। दूसरों और प्रकृति की भावनाओं का हमें सम्मान करना चाहिए।

कहानीकार-
#दमयन्ती_राणा (स०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० ईड़ाबधाणी
कर्णप्रयाग, चमोली (उत्तराखण्ड)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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