215/2025, बाल कहानी - 15 दिसम्बर
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 215/2025
*15 दिसम्बर 2025 (सोमवार)*
#बाल_कहानी - #रीमा_और_सीमा
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रीमा और सीमा दोनों सौतेली बहनें थीं। रीमा बड़ी थी और सीमा छोटी। दुर्भाग्य से रीमा सौतेली माँ की बेटी थी, इसलिए उसके हिस्से में हमेशा उपेक्षा और काम ही आता। सुबह से शाम तक घर का सारा काम रीमा से कराया जाता, जबकि सीमा को उसकी माँ खूब लाड़-प्यार करती। उससे कोई काम नहीं करवाया जाता।
सीमा का नाम विद्यालय में लिखवा दिया गया, पर रीमा को पढ़ने का अवसर नहीं मिला। उसे घर के काम-काज में ही उलझाकर रखा गया, जबकि रीमा को पढ़ाई का बहुत शौक था। जब भी वह सीमा को किताबें पढ़ते देखती, उसका मन भी पढ़ने को मचल उठता। मौका मिलते ही वह सीमा की किताबें उठाकर पढ़ने लगती। जब ट्यूशन पढ़ाने मास्टर जी आते, तो रीमा चुपचाप एक कोने में बैठकर सब सुनती और सीखने की कोशिश करती।
एक दिन सीमा की तबियत बहुत खराब हो गई। कई दिनों तक वह स्कूल नहीं जा सकी, जिससे उसका पढ़ाई का काम बहुत छूट गया। बीमारी के कारण उसका शरीर इतना कमजोर हो गया कि उससे पढ़ना तो दूर, कुछ भी करना मुश्किल हो गया।
रीमा ने देखा कि सीमा अपने अधूरे काम को लेकर बहुत परेशान है। वह उसके पास गयी और प्यार से बोली, “लाओ, मैं तुम्हारा काम कर दूँ।”
सीमा ने हैरानी से कहा, “तुम कैसे करोगी? तुम्हें तो कुछ आता ही नहीं।”
रीमा बिना कुछ कहे उसका काम करने लगी। थोड़ी ही देर में उसने सारा काम सही-सही कर दिया। सीमा यह देखकर दंग रह गई। उसी समय सीमा के माता-पिता भी पीछे खड़े सब देख रहे थे। उन्हें भी यह देखकर गहरा आश्चर्य हुआ कि रीमा इतनी अच्छी तरह पढ़-लिख कैसे लेती है?
पूछने पर रीमा ने सच्चाई बता दी कि कैसे वह छुप-छुपकर पढ़ती थी? दूसरों से सीखती थी और किताबों से दोस्ती कर चुकी थी। यह सुनकर माता-पिता का मन भर आया। उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ और वे बहुत पछताये कि अगर उन्होंने रीमा पर भी ध्यान दिया होता, तो आज वह भी विद्यालय में पढ़ रही होती।
उस दिन से उन्होंने निश्चय किया कि रीमा को भी पढ़ने का पूरा अधिकार मिलेगा।
#संस्कार_सन्देश -
शिक्षा पर हर बच्चे का समान अधिकार है। किसी को भी इससे वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
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कहानीकार -
#रुखसार_परवीन(सoअo)
संविलयन विद्यालय गजपतिपुर
बहराइच (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम#मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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