206/2025, बाल कहानी- 04 दिसम्बर

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 206/2025 
*04 दिसम्बर 2025 (गुरुवार)*
#बाल_कहानी- #मिठास 
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एक मिठाई की दुकान के बाहर बहुत भीड़ लगी हुई थी। भीड़ लगने की वजह यह थी कि दुकानदार की मिठाइयाँ बहुत दूर-दूर तक प्रसिद्ध थीं। उनकी मिठाइयों का स्वाद ऐसा था कि हर कोई उसे एक बार चखना जरूर चाहता था। एक दिन एक सेठ जी आये और मिठाई लेने लगे। पास में ही खड़ा गरीब बालक दीपू बहुत देर से मिठाइयों की तरफ ताक रहा था। हर आदमी मिठाई लेकर जा रहा था लेकिन किसी की निगाह उस पर नहीं पड़ी।
दीपू ने सेठ जी से कहा, "चाचा मुझे भी मिठाई खानी है!" सेठ जी ने उसे झिड़कते हुए कहा, "चल हट यहाँ से! दूर भाग जा।"
बालक दीपू दूर हट गया। तभी वहाँ पास में खड़े हुए एक सिपाही की नजर उस पर पड़ी। सिपाही दीपू के पास गया और पास जाकर पूँछा, "क्या बात है बेटा! मिठाई चाहिए?" बालक दीपू ने 'हाँ' में सर हिला दिया।
सिपाही दुकान पर गया और दुकानदार से कहा, "एक किलो मिठाई मेरे लिए पैक कर दीजिए।" और कुछ मिठाई अलग खरीद कर बालक दीपू को दे दी। जैसे ही बालक दीपू ने मिठाई खायी, उसके चेहरे पर अलग ही खुशी थी। सिपाही ने उसके चेहरे को देखा तो उसके चेहरे पर खुशी की मुस्कान आ गई। बालक दीपू मिठाई खा रहा था। और सिपाही को ऐसा लग रहा था कि जो मिठाई वह खरीद कर ले जा रहा है मानो उसका बेटा खा रहा है। 
आज सुबह ही उसके बेटे ने कहा था, "पापा! मेरे लिए मिठाई लाना।" सिपाही बालक के चेहरे पर आयी मुस्कान के साथ उस खुशी को अपने बेटे की मुस्कान के साथ रखकर देख रहा था कि इतना ही खुश उसका बेटा होगा और वह मिठाई लेकर वहाँ से चला गया।

#संस्कार_सन्देश - 
हमें हमेशा दूसरों की मदद करनी चाहिए। यही सच्ची मानवता है।

कहानीकार- 
#शालिनी (स०अ०)
प्राथमिक विद्यालय न० कूँड 
करहल, मैनपुरी (उ०प्र०)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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