विश्व वानकी दिवस

हुआ जब भी मन अशांत,

चित्त भी रहा बहुत क्लांत।

प्रकृति की गोद में सुकून पाया,

दिवस मनाकर हुई चिंता शांत।।


21 मार्च को इस दिवस का प्रावधान,

वृक्ष की सुरक्षा को समर्पित जहान।

साँसों की रफ्तार पर न लगे विराम,

जीने दो वृक्षों को न करो हलाकान।।


जागरूकता फैलाना हमारा है ध्येय,

संयुक्त राष्ट्र संघ, कृषि संगठन का है श्रेय।

तीन महत्वपूर्ण तत्व- सुरक्षा, उत्पादन और वन विहार,

पेड़-पौधों पर कीट-पतंगों के रहने का ध्येय।।


मातृभूमि की मिट्टी, वनसंपदा का महत्व जान,

संरक्षण करना इसका अपना उद्देश्य मान।

संपूर्ण जटिल जीवंत समुदाय से हैं अभिप्राय,

पेड़ -पौधे, जीव- जंतु से मिलकर वन की शान।।


जल और वन से सुरक्षित है जीवन,

वन संपदा करे मानव जीवन आसान।

देश की राष्ट्रीय निधि का बचाव, सुरक्षा है जरुरी,

विश्व वानिकी दिवस मानकर बचाओ पर्यावरण।।


रचयिता
नम्रता श्रीवास्तव,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय बड़ेह स्योढ़ा,
विकास खण्ड-महुआ,
जनपद-बाँदा।

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