शिव विवाह

नीलकंठ का वार है, भक्त करें जयकार। 

बेलपत्र से आज सब, नमन करें परिवार।। 


भांग धतूरा बेर से, थाल सजाओ आज। 

पुष्प माल से नाथ को, संग चढा़ओ ताज।।  


सुता हिमालय की चलीं, कर सोलह श्रृंगार। 

ओढ़ चुनरिया शीश पर, रूपवती है नार।। 


चली सती जी आज हैं, लिए फूल की माल। 

रूद्र खडे़ हैं सामने, तिलक लगा है भाल।। 


नयन सजे लज्जा बड़ी, मन में भाव उदार। 

माला डालूँ ईश को, उर में भरे विचार।। 


शीश गंग की धार है, सर्प गले का हार। 

कर त्रिशूल को जो लिए, शंकर जग के सार।। 


सात वचन के संग में, हुआ ब्याह शिव साथ। 

जन्मों की यह साधना, रहे हाथ में हाथ।। 


रचयिता

गीता देवी,

सहायक अध्यापक,

प्राथमिक विद्यालय मल्हौसी,

विकास खण्ड- बिधूना, 

जनपद- औरैया।



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