बात ही पहचान

बात जो बोलो हमेशा सोच कर बोला करो,
बात ही पहचान, अपनी बात को तोला करो।
बात मंतर से कम न हो, तथ्य से भरपूर हो,
स्वार्थ का लवलेश न हो, छद्म से भी दूर हो,
लोक हित में बात हो, निर्भीक हो बोला करो।
बात मीठी, मृदुल भाषा, शान्ति सुख का मूल है,
बात ही कड़वी कसैली मित्रधाती शूल है,
कटु से कटुतम बात में भी मधुर रस घोला करो।
बात की महिमा बड़ी है बात प्रवाह स्वरूप हो,
सत्य, शिव, सुंदर समाहित बात का प्रारूप हो।
बात पर अटल होकर तुम बात को बोला करो।
मर्म जानो बात का तुम बात ही अनमोल है।
रघु से लेकर राम कुल में बात का ही मोल है,
बात के गौरव के ख़ातिर कष्ट को झेला करो।

रचयिता
हिमांशु मिश्रा,
प्राथमिक विद्यालय पारसाथ,
विकास खण्ड-मडियाहूं,
जनपद-जौनपुर।

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