मेरे कन्हैया

कान्हा का जन्मदिन आया है,
हर बच्चा कान्हा बन मुस्काया है।

नटखट है कृष्ण कन्हैया,
बलराम है उसके दाऊ भैया।

यशोदा माँ का माखन खाये,
मन्द मन्द मुस्काये यशो मैया।

राधा संग रास रचाये,
छुप छुप देखें गोपियाँ।

श्याम की बंशी पर झूमें,
गोपियों संग सारी गैया।

दोस्ती हो तो कान्हा सुदामा सी,
सुदामा की पार लगाई नैया जी।

नटखट शैतानियों में तुम,
सबका बचपन छुपाकर रखना।

राधा और मीरा का आना,
प्यार का नया रूप दिखाना।

मेरे प्यारे कान्हा ,हर बरस आना,
दही और माखन भी खाना।

व्रन्दावन और मथुरा संग,
पूरी दुनिया में छा जाना।

रचयिता
रीना सैनी,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय गिदहा,
विकास खण्ड-सदर,
जनपद -महाराजगंज।

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