हमें भी पढ़ना है

हमें भी पढ़ना है,
हमें भी लिखना है।
किताबों में लिखा,
जो ज्ञान सारा है।
उसी में उजालों का,
पैगाम प्यारा है।
       उन्हें ले हाथ में पढ़ना,
       लिखे उस ज्ञान को गुनना।
       यही सकल्प न्यारा है।
       ये सपना हमारा है।
नयी हर बात सीखेंगे,
नयी हर बात जानेंगे।
कहानी भी सुहानी है,
दो बैलों की कहानी है।
        विविधता से भरी हैं,
        लोक गाथाएँ गहरी हैं।
        पशु पक्षियों की कहानी,
        नदी सागर झील का पानी।
आकाश के सितारे,
बहुत सुन्दर से नजारे।
वन और उपवन हैं,
धरती पर जो जन हैं।
         शोध है विज्ञान करता,
        अन्तरिक्ष में यान चलता।
         लोक की विधि व्यवस्था,
         है विविध मानव अवस्था।
सब पढेंगे, हम किताबें
हम रहेंगे रोज आगे।
ये किताबें है हमारी,
पढ़ो तुम हैं ये प्यारी।

रचयिता
सतीश चन्द्र "कौशिक"
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय अकबापुर,
विकास क्षेत्र-पहला, 
जनपद -सीतापुर।

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