मित्रता

जीवन का आधार मित्रता।
प्रेम बिन निराधार मित्रता।
शक्ति एक अनोखी देखी।
विश्वास का पार मित्रता।

रिश्ता एक - एक निभता है।
कदम देख - देख रखता है।
मित्र बनाना नहीं  कठिन है।
ये रिश्ता सेक - सेक पकता है।

फल मीठे मिल जाते इसमें।
जीवन राग सुनाते जिसमें।
कुछ फल सच्चे कड़वे हैं।
सब सच्चा मार्ग बताते उसमें।

जो सही राह दिखलाएगा।
वो घाव सहा सिखलाएगा।
कभी  मेरे  झल्लाने  पर।
सुख - दुख की छाँह बन जाएगा।

शक्ति जो उससे मिलती है।
वाणी भी जिसमें घुलती है।
भाव विचार सभी समाए हैं।
मित्रता मेरी उसी से पलती है।

रिश्ता ये ख़ूब निभाया है।
जिसे जग ने ख़ूब सराहा है।
अपनी ख़ुशियों को त्याग सदा।
उसके आँगन को ख़ूब सजाया है।

रचयिता
अरूणा कुमारी राजपूत,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय राजपुर(अंग्रेजी़ माध्यम),
विकास खण्ड-सिंभावली , 
जिला-हापुड़।

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