मित्रता दिवस

विटप की छाया समान,
जिसकी मिले शीतलता।
बसंत की हवा सरीखी,
जिसकी रहे निर्मलता।
हर पग पर साथ देने में,
जिसकी रहे बहुलता।
हर ले जो निज तेज से,
मन की हर मलिनता।
         कष्टों में भी दे साथ पल-पल,
         सुख से आच्छादित करे।
         निज अभिलाषाओं से प्रबल,
         जो हित-हितैषी बन रहे।
धन्य ऐसे मित्र हैं जो,
जीवन को सुखमय करें।
निज नेह की बारिश करा,
जो 'दम' में हरदम 'दम' भरें।
       
रचयिता
अरविन्द कुमार सिंह,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय धवकलगंज, 
विकास खण्ड-बड़ागाँव,
जनपद-वाराणसी।

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