झाँसी की रानी

वो वीरांगना, वो अद्भुत नारी
वो थी भारतीयों की शान
झाँसी की रानी हमारी
शैशव से ही वीरांगना बनने का
शौक था उसने पाला
यौवन निकला रणभूमि में
हाथ में शोभित रहते उसके
 सदैव कृपाण और भाला
वो थी निडर निर्भीक क्रन्तिकारी
वो वीरांगना, वो अद्भुत नारी
वो थी भारतीयों की शान
झाँसी की रानी हमारी

शमशीर, ढाल और कटार
ये थे उसके अनुपम श्रृंगार
गोरों की भृकुटी तन जाती
देखकर उसकी कृपाण का प्रहार
अंग्रेजों के छक्के छूटा दिये
 ऐसी थी वो पराक्रमी नारी
वो वीरांगना, वो अद्भुत नारी
वो थी भारतीयों की शान
झाँसी की रानी हमारी

जब भी वो रणभूमि में उतरी
फिर उस वीरांगना ने ना हार मानी
दुश्मनों को लोहा मनवाकर
मँगवा देती उनको पानी 
सन अट्ठारह सौ सत्तावन के स्वतंत्रता संग्राम में
वो तो खूब लड़ी दुर्गा, चंडी बन
देश के लिए अपनी जान वारी
वो वीरांगना, वो अद्भुत नारी
वो थी भारतीयों की शान
झाँसी की रानी हमारी

रचयिता
रीनू पाल,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय दिलावलपुर,
विकास खण्ड - देवमई,
जनपद-फतेहपुर।

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