संत रविदास

मंदिर, मस्जिद न गुरुद्वारे 

मेहनत ही हैं प्रभु हमारे।

रविदास जी की सीख यही

कर्म ही है असली बही।

बस कर्म में ही देखा उन्होंने 

होता है प्रभु जी का वास।

मेहनत की रोटी में पाया

भक्ति का निर्मल उजास 

न जप- तप, न माला ज्ञान

न ही ऊँची पढ़ी अजान।

पवित्र भाव से कर्म करो

वही है प्रभु का सच्चा ध्यान।

मन चंगा तो कठौती में गंगा

नहीं है केवल कहने की बात।

जीवन की हर छोटी क्रिया

बन सकती है विमल प्रभात।

श्रम को पूजा मान लिया

जो पार करे जीवन मझधार।

रविदास ने दिखलाई सबको

मानवता की यही है धार।

जो कर्म करे निस्वार्थ भाव से

वह ईश्वर का सच्चा भक्त।

रविदास की राह पर चलकर

कोई भी हो सकता है मुक्त।


रचयिता

डॉ0 निशा मौर्या, 

सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय मीरजहांपुर,
विकास खण्ड-कौड़िहार-1,
जनपद-प्रयागराज।

Comments

Total Pageviews