29/2026, बाल कहानी- 20 फरवरी
#दैनिक_नैतिक_प्रभात- 29/2026
*20 फरवरी 2026 (शुक्रवार)*
#बाल_कहानी- #वृक्ष_मित्र_प्रदीप
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साँवला सा गोल-मटोल प्रदीप कक्षा चार में पढ़ाता था। उसका रंग तो साँवला था, पर वह अपने व्यवहार से सबका मन जीत लेता था।
एक और खासियत थी उसमें कि वह पढ़ता-लिखता बिल्कुल नहीं था। पर रोज विद्यालय आता था और विद्यालय की हर गतिविधि में भाग लेता था। चाहे विद्यालय का श्यामपट कार्य हो, बच्चों के हाथ धुलाना हो, पौधों में पानी डालना हो, सभी काम बड़ी जिम्मेदारी से करता था।
एक काम और वह बड़े ध्यान से करता था। वह प्रार्थना के समय ही सभी बच्चों को देख लेता था कि कौन बच्चा अनुपस्थिति है? फिर वह पूछता था। मैडम हम बुला लाएँ उस बच्चे को और मना करते-करते वह अपने मित्र के साथ बच्चों को बुलाने चला जाता था। उसके कारण विद्यालय के बच्चे अनुपस्थिति नहीं रह पाते थे। प्रदीप पढ़ता जरूर नहीं था, पर हर बात गौर से सुनता था और ग्रहण करता था। विद्यालय में रोज नैतिक संस्कार और पर्यावरण संरक्षण, पानी बचाओ आदि विषयों पर चर्चा होती थी, जिसे वह बड़े ध्यान से सुनता था।
एक दिन विद्यालय में खण्ड शिक्षा अधिकारी महोदय निरीक्षण के लिए आये और उन्होंने बच्चों से प्रश्न पूछे। प्रदीप ने सभी प्रश्नों के सही-सही उत्तर दिए तो उन्होंने खुश होकर अनायास ही पूछ लिया कि "तुम्हारे पापा क्या करते हैं?"
"पेड़ों की रक्षा और मजदूरी...।" उत्तर सुनकर तो खण्ड शिक्षा अधिकारी खुद आश्चर्य में पड़ गए।
प्रदीप ने बताया कि, "उसके पापा पेड़ काटने का ठेका लेते थे, पर अब उन्होंने पेड़ काटना बन्द कर दिया है और मजदूरी करने लगे हैं। पेड़ काटना गलत है न।"
"तुम्हारे पापा को किसने बताया कि पेड़ काटना गलत है?" अधिकारी महोदय ने पूछा।
"मैंने बताया न.. मैडम रोज विद्यालय में बताती हैं कि पेड़ काटने से धरती और पर्यावरण को नुकसान होता है और हमें साँस लेने के लिए हवा पेड़ों से ही तो मिलती है। अगर पेड़ नहीं रहेंगे तो हम कैसे जीवित रहेंगे? यह बात मैं रोज अपने पापा को बताता हूँ और उन्होंने पेड़ काटना छोड़ दिया है।"
एक छोटे से बच्चे द्वारा शिक्षा को व्यवहारिक रूप से फलीभूत होते देखकर खण्ड शिक्षा अधिकारी महोदय बहुत खुश हुये। उन्होंने नकद धनराशि देकर प्रदीप को पुरस्कृत किया और सभी बच्चों को उसका उदाहरण दिया।
इस तरह पढ़ने-लिखने में जीरो प्रदीप विद्यालय के हीरो बन गए। अब प्रदीप को "वृक्ष मित्र" के नाम से कई पुरस्कार और सम्मान-पत्र मिल चुके हैं।
#संस्कार_सन्देश-
पढ़कर व्यवहार में लाने पर ही शिक्षा सार्थक होती है।
कहानीकार-
#जमीला_खातून (से०नि०प्र०अ०)
प्रा० पा० गढ़धुरिया गंज,
नगर क्षेत्र- मऊरानीपुर (झाँसी)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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