16/2026, बाल कहानी- 05 फरवरी
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 16/2026
*05 फरवरी 2026 (गुरुवार)*
#बाल_कहानी - #गाँव_की_सैर
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एक शहर में चंपक नाम का व्यक्ति अपने परिवार के साथ रहता था। उसकी पत्नी मोनिका अक्सर बीमार रहती थी। उसे भूलने की बीमारी थी। चंपक ने अपनी पत्नी का बहुत इलाज कराया, पर बीमारी कम-ज्यादा हो रही थी। डाक्टर ने मोनिका को गाँव की ताजी हवा में रहने की सलाह दी और गाँव की सैर करने को कहा।
चंपक को अपने मित्र दीनू की याद आई। वह एक गाँव में रहता था। चंपक ने सोचा कि एक सप्ताह के लिए गाँव जाना चाहिए। वह अगले दिन अपने परिवार के साथ गाँव के लिए निकला। तीन-चार दिन की यात्रा करके चंपक दीनू के गाँव पहुँच ही गये। दीनू और उसका परिवार उन लोगों को देखकर बहुत खुश हुआ। दीनू ने उनका स्वागत और सम्मान किया तथा उनके भोजन का प्रबन्ध भी किया। कई प्रकार के व्यञ्जन बनवाये और उन सबको भोजन कराया। चंपक ने दीनू को एक सप्ताह उनके घर रूकने की बात कही और गाँव के आस-पास की सुन्दर जगहों को देखने की इच्छा जतायी। दीनू उनकी इस प्रकार की इच्छा को सुनकर बहुत खुश हुआ। अगले दिन ही वह अपने गाँव के आस-पास के दर्शनीय स्थलों की सैर कराने ले गया।
चंपक और उसका परिवार शहरों में रहते थे। कभी गाँव नहीं आये थे। गाँव का वातावरण उन्हें बहुत पसन्द आ रहा था। वे गाँव के वातावरण और प्राकृतिक जगहों को देखकर बहुत खुश हो रहे थे। दीनू ने सबसे पहले उन लोगों को अपने गाँव की एक सुन्दर नदी का दर्शन कराया। वह नदी ऐसी थी कि वहाँ का पानी हमेशा साफ और शुद्ध रहता था। सब लोगों ने वहाँ पर स्नान किया और उसके बाद वहीं पर शिव जी के मंदिर में पूजा-अर्चना की। दीनू ने बताया कि, "उनके गाँव के जंगल में एक गुफा है। वहाँ एक वैद्य रहता है। वह बहुत सारी बीमारियों का इलाज करता है। चंपक ने इस बात को सुनकर वैद्य से मिलने की इच्छा व्यक्त की। फिर वे लोग उस गुफा में जाने के लिए निकल पड़े। सभी उस गुफा तक जाते-जाते बहुत थक गए थे। चंपक को बहुत प्यास लगी थी।
दीनू के पास लौकी फल से बनाया एक पानी पात्र था। उसने चंपक को पानी पिलाया और आगे बढ़ेकर कुछ दूर जाकर वे लोग गुफा पर पहुँच गये। उन्होंने गुफा में प्रवेश किया। दीनू और उसकी पत्नी और बच्चे सभी ने वैद्य को प्रणाम किया। फिर दीनू ने चंपक की पत्नी की बीमारी के बारे में उस वैद्य को बताया। वैद्यराज ने उसकी नाड़ियों को छछकर बीमारी का पता लगाया और उसे जड़ी-बूटी खाने और लगाने को दिया। चंपक की पत्नी ने उन जड़ी-बूटियों को खाया और कुछ जड़ी-बूटियों को अपने सिर पर लगाया। कुछ दिनों में ही उसकी पत्नी की वह बीमारी दूर हो गई। साथ ही भूलने की बीमारी भी दूर हो गई। चंपक और उसका परिवार बहुत खुश हुआ। उसने वैद्यजी और दीनू को बहुत धन्यवाद दिया।
अगले दिन चंपक, दीनू और उसकी पत्नी से विदा ले शहर वापस आ गये।
जंगल में सारी बीमारियों का इलाज है। कुछ ऐसे वैद्य भी रहते हैं, जिन्हें बड़ी-बड़ी बीमारियों के इलाज की जानकारी रहती है। बशर्तें हमें जानकारी नहीं रहती है। कभी-कभी गाँव जाने पर ही पता चल पाता है।
#संस्कार_सन्देश -
गाँव का वातावरण शहरों के वातावरण से बहुत अच्छा होता है। साथ ही कुछ ऐसे वैद्य भी मिल जाते हैं, जिन्हें बड़ी-बड़ी बीमारियों के इलाज की जानकारी रहती है।
कहानीकार-
#प्रेमलाल_किशन (स०शि०)
शासकीय प्राथमिक विद्यालय बुढ़नपुर
संकुल केन्द्र गहरीनमुड़ा,
विकास खंड व जिला-सक्ती, छत्तीसगढ़
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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