27/2026, बाल कहानी- 18 फरवरी

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 27/2026
*18 फरवरी 2026 (बुधवार)*
#बाल_कहानी - #तेरे_कारन
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जिला स्तरीय प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने के पश्चात् निधि का मनोबल और अधिक ऊँचा हो गया । वह राज्य स्तर पर प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने हेतु अत्यन्त उत्सुकता से इन्तजार करने लगी। उसकी खुशी तब और बढ़ गई, जब उसे ज्ञात हुआ कि, उसके साथ उसकी माँ भी आयेंगी। निधि की माँ दैनिक ग्रामीण कार्यों में व्यस्त रहकर, घर गृहस्थी चला रही साधारण गृहणी महिला थी, जिन्हें व्यस्तता के कारण अन्यत्र जाने का मौका नहीं मिल पाता था। 
सीमांत पूर्व क्षेत्र से दूरस्थ पश्चिम में स्थित राजधानी तक का लम्बा पहाड़ी सफर काफी थका देने वाला था तथा नन्हे बच्चों की इच्छा के अनुरूप उनके एक अभिभावक का संग सर को भी जँचा, जिससे उन्होंने निधि व अन्य बालक के अभिभावकों से सम्पर्क किया तो निधि की माँ तैयार हो गई क्योंकि उसके पिताजी घर से काफी दूर सर्विस पर थे। उन्होंने भी खुशी-खुशी सफर में बच्चों को सँभालने हेतु जाने के लिए फोन पर हामी भर दी। 
तीन दिन बाद तड़के सफर शुरू हुआ। प्रतिभाग करने जा रहे बच्चे निधि व आयुष अपनी राजधानी में पहुँचकर अपना सर्वश्रेष्ठ देने को आतुर थे ही, साथ ही आज तक जिस नाम को राज्य की राजधानी के रूप में नित्य पढ़ते-सुनते व बोलते आए थे, उसे प्रत्यक्ष देखने का सुअवसर आज मिल रहा था। 
सफर में वह अनेक नगर, नदियों, खास चीजों व स्थानों को देख रहे थे, जिनकी जानकारी वह सर से पूछ-पूछकर पता करते जा रहे थे। सबसे अधिक खुशी तब हुई, जब उन्होंने गंगा नदी के दर्शन किए। रोज राष्ट्रगान में जब वह यमुना-गंगा बोलते तो नदियों की कल्पना में खो जाते। 
आज जब साक्षात् शस्यश्यामला पवित्र तरंगिणी देवनदी को जीवन में पहली बार देखा, तो देखते ही रह गए। इतना सारा पानी व इतने सारे लोगों को उसके तट पर स्नान करते हुए वह जीवन में पहली बार देख चकित हो गए। उन्होंने जी-भरकर गंगा दर्शन किया व सन्तुष्टि का अनुभव किया। रास्ते में भोजनोपरान्त सफर की थकान से बच्चे माँ की गोद में ही सो गए, जो देर सायं राजधानी पहुँचकर ही जगे। 
वहाँ पहले से सरकारी अतिथि गृह उनके स्वागत के लिए तैयार था, जहाँ चमचमाते फर्श, कमरों व लजीज भोजन ने उन्हें प्रसन्न कर दिया। अगले दिन दोनों बच्चों ने दिल लगाकर प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया और अपने राज्य के अन्य जिलों के बच्चों से परिचय किया। सभी बच्चे आपस में घुल-मिलकर आज एक रंगीन गुलदस्ते के रूप में राज्य के बहुरंगी प्रतीक नजर आ रहे थे। 
 यद्यपि प्रतियोगिता में स्थान पाने से वह थोड़ा चूक गए थे लेकिन आयोजन कर्ताओं द्वारा सारे बच्चों को दिया गया एकसमान सम्मान व उनके दैनिक उपयोग के आकर्षक गिफ्ट, जो सभी बच्चों को दिए गए, को प्राप्त करते हुए और उनकी उपलब्धियों का बखान सारे बच्चों को बहुत भाया। सभी बच्चों ने अगले वर्ष और अधिक मेहनत करते हुए अपने बेहतर प्रदर्शन का मन ही मन संकल्प लिया। 
आते हुए सब लोगों ने गंगाजी में पवित्र स्नान किया व पावन गंगाजल केनों में भरकर अपने साथ लाये। तभी भावुक होकर गाड़ी में निधि की माँ बोल उठी, "धन्य है बेटा! तेरे कारन आज मुझे भी इतना सब कुछ देखने को मिला और वर्षों से गंगा स्नान की आस पूर्ण हो पाई। " यह कहते हुए अब उनकी आँखें भी भर आईं थीं।

#संस्कार_सन्देश -
गंगा हमारी पवित्र और पूजनीय नदी है। अनेक पौराणिक कथाएं इससे जुड़ी हुई हैं। हमें इसका दर्शन जरूर करना चाहिए।

कहानीकार-
#दीवान_सिंह_कठायत (स०अ०)
 रा० आ० प्रा० वि० उडियारी (बेरीनाग) पिथौरागढ

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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