36/2026, बाल कहानी- 28 फरवरी
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 36/2026
*28 फरवरी 2026 (शनिवार)*
#बाल_कहानी- #दान
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एक छोटे से गाँव में रामू नाम का एक दयालु और मददगार व्यक्ति रहता था। उसे दूसरों की सहायता करना बहुत अच्छा लगता था। जब भी किसी को जरूरत होती, रामू बिना सोचे उसकी मदद के लिए तैयार हो जाता।
एक दिन रामू किसी जरूरी काम से बाजार जा रहा था। रास्ते में उसने देखा कि सड़क किनारे एक युवती बैठी हुई है। उसके कपड़े पुराने और मैले थे। बाल बिखरे हुए थे और पैरों में चप्पल भी नहीं थी। वह बहुत थकी और परेशान दिखाई दे रही थी। यह देखकर रामू का दिल पसीज गया।
रामू तुरन्त घर लौटा और अपनी पत्नी से बोला, “रास्ते में एक बेचारी युवती बैठी है। वह बहुत गरीब लग रही है। हमें उसकी मदद करनी चाहिए। तुम अपनी पुरानी चप्पलें दे दो और मैं उसे कुछ पैसे दे देता हूँ, ताकि उसका काम चल सके।”
रामू की पत्नी भी दयालु थी। उसने मुस्कुराते हुए कहा, “जरूर, किसी की मदद करना सबसे बड़ा पुण्य होता है।” उसने अपनी पुरानी लेकिन अच्छी हालत वाली चप्पलें रामू को दे दीं और वह भी रामू के साथ चल दी।
रामू चप्पल और कुछ पैसे लेकर अपनी पत्नी के साथ उस युवती के पास पहुँचा। उसने प्यार से कहा, “बहन! तुम्हारे पैरों में चप्पल नहीं है। ये पहन लो, और ये कुछ पैसे रख लो।”
"हाँ..हाँ..रख लो।" रामू की पत्नी बोली।
जैसे ही रामू पैसे देने के लिए आगे बढ़ा, तभी पास में खड़े सुरेश ने उसे रोकते हुए कहा, “ठहरो रामू! पहले पूरी बात जान लो। यह युवती सच में गरीब नहीं है। यह अक्सर नशा करके यहाँ आकर बैठ जाती है।”
यह सुनकर रामू को बहुत आश्चर्य हुआ। उसने ध्यान से देखा तो युवती सचमुच नशे में लग रही थी। रामू ने चुपचाप चप्पल और पैसे वापस रख लिए और घर लौट आया।
घर आकर उसने पत्नी से इस विषय पर चर्चा की। उसकी पत्नी ने समझदारी से कहा, “मदद करना बहुत अच्छी बात है, लेकिन बिना सच्चाई जाने किसी को मदद देना सही नहीं। हमें हमेशा समझदारी से फैसला लेना चाहिए।” उस दिन रामू ने एक नई सीख सीखी- दया के साथ-साथ समझदारी भी जरूरी होती है।
#संस्कार_सन्देश -
हमें हमेशा जरूरतमन्द लोगों की मदद करनी चाहिए, लेकिन पहले सच्चाई जान लेना भी जरूरी है।
कहानीकार-
#रुखसार_परवीन (स०अ०)
उच्च प्राथमिक विद्यालय गजपतिपुर
बहराइच (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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