20/2026, बाल कहानी- 10 फरवरी

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 20/2026
*10 फरवरी 2026 (मंगलवार)*
#बाल_कहानी - बन टू थ्री
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"वन टू थिली..... एक दो तीन.....।" तोतली आवाज में बोलते हुए नन्हा आयुष आँगनवाड़ी की कक्षाओं में रोज अन्य हम उम्र साथी बच्चों के साथ गिनती सीखने का खेल-खेल में अभ्यास करता। धीरे-धीरे वह टैन तक याद कर चुका था और "वन टू थ्री- वन टू थ्री" कहकर अपने प्ले-स्कूल आँगनवाड़ी की पहचान अपने मन में बसा, अन्य को भी अपने स्कूल का परिचय दिया करता, जिसे लोग सहज ही समझ जाते। 
दो वर्ष बाद अब वह बाल-वाटिका के छात्र के रूप में निकट के प्राथमिक विद्यालय में दाखिला लेकर अन्य बच्चों के साथ घुल-मिल गया और सौ तक गिनती व वर्णमाला तथा कुछ छोटे-छोटे शब्दों को जान चुका था। यहाँ वह बच्चों को चुस्ती-फुर्ती के साथ, वन टू थ्री फोर ..... सुनता हुआ व्यायाम करता देखता और विद्यालय स्तर पर होने वाली प्रतियोगिताओं में भी वन टू थ्री पोजीशन प्राप्त बच्चों को सम्मानित होते हुए देख, थोड़ा-थोड़ा इसका महत्व भी समझने लगा। अब वह मन ही मन इसे एक आदर्श वाक्य के रूप में ग्रहण कर चुका था। आगे की कक्षाओं में वह अनेक प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेकर वन, टू या थ्री पोजीशन के लिए भरपूर संघर्ष करता व सफलता पाता। 
उसके कक्षा पाँच में पढ़ते हुए इस बार उनके विद्यालय के बच्चों ने शारीरिक एवं बौद्धिक प्रतियोगिताओं में संकुल एवं ब्लॉक स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए यह स्थान प्राप्त कर लिए, जिनमें वह स्वयं प्रथम व उसके सहपाठी ही द्वितीय व तृतीय स्थान पर रहे। 
आज जिले स्तर पर होने जा रही बौद्धिक प्रतियोगिता में भी उनका बेहतरीन प्रदर्शन रहा और जब परिणाम घोषित हुए तो उनका जीत का यह क्रम बरकरार रहा, जिसने सभी को चौंका दिया था। अधिकारियों के हाथों उसे व उसके साथियों को सम्मानित होता देख उसे बहुत अच्छा लगा और आगे भी अच्छा कर दिखाने का उसके भीतर जोश पैदा हुआ जा रहा था। अब, "वन टू थ्री" आयुष के चुस्ती-फुर्ती व जीवन्तता का मूल मन्त्र जो बन चुका था।

#संस्कार_सन्देश -
दूसरों को आगे बढ़ते और सम्मानित होते देख हमारे मन में आगे बढ़ने और कुछ करने की प्रेरणा उत्पन्न होती है।

कहानीकार-
#दीवान_सिंह_कठायत (प्र०अ०)
रा० आ० प्रा० वि० उडियारी बेरीनाग (पिथौरागढ़)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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