12/2026, बाल कहानी- 31 जनवरी

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 12/2026
*31 जनवरी 2026 (शनिवार)*
#बाल_कहानी - #डर
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रामू एक शरारती लड़का था। उसे दूसरों की हँसी करने में बहुत आनन्द आता था। सभी लड़के उससे बहुत परेशान रहते थे।
एक दिन रामू जंगल में अपने साथियों के साथ घूम रहा था। घूमते-घूमते वे सब एक नदी के किनारे जा पहुँचे। रामू ने सभी को नदी में नहाने को कहा। उन साथियों में एक श्याम नाम का लड़का था। उसे तैरना नहीं आता था। सभी लड़के नहाने लगे। रामू ने श्याम को भी नहाने को कहा। श्यामू ने कहा, "मुझे तैरना नहीं आता है। तुम सब नहाओ, मैं यहीं बैठा रहूँगा।"
"ऐसा कैसे हो सकता है? हम सब नहाएँ और तुम चुपचाप बैठे रहो। यह उचित नहीं है। आओ, इस बहाने तुम तैरना भी सीख जाओगे।" यह कहकर रामू उसे तैरने के लिए पकड़कर ले जाने लगा। श्याम मना करता रहा। रामू ने उसे जबरदस्ती नदी में पटक दिया। श्याम घबड़ा गया। वह नदी में डूबने लगा। उसके मित्रों ने उसे बड़ी कठिनाई से बाहर निकाला और दूर बैठ जाने को कहा। सभी साथी नदी में नहाने लगे। नहाते-नहाते रामू दूर चला गया और दलदल में फँस गया। वह चिल्लाने लगा, "बचाओ..बचाओ!" सभी साथी उस ओर दौड़े। उनकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि रामू को कैसे बचाया जाये?
तभी श्यामू ने एक पेड़ पर लटकती हुई एक लंबी बेल तोड़ी और उसका एक सिरा रामू की ओर फेंका और उसे पकड़ने को कहा। रामू ने बेल पकड़ ली और दूसरी ओर सभी साथी मिलकर उस बेल को खींचने लगे। रामू नदी के किनारे आ गया और बाहर आ गया।
रामू को अब अपने किए पर पछतावा था। उसने श्याम से कहा, "श्याम! मैंने तुम्हें नदी में डुबाने की कोशिश की और तुमने मेरी जान बचायी। मुझे माफ कर दो! मुझे तुम जैसा मित्र मिला, यह गर्व की बात है। चलो, घर चलें।"
सभी साथी यह सुनकर बहुत प्रसन्न हुए। अब उनके मन से रामू का डर सदा के लिए समाप्त हो चुका था।

#संस्कार_सन्देश -
हमें किसी की मजबूरी का अकारण लाभ उठाकर उसे परेशानी में नहीं डालना चाहिए, अन्यथा एक दिन हम भी संकट में पड़ सकते हैं। 

कहानीकार-
जुगल किशोर त्रिपाठी (शि०मि०)
प्राथमिक विद्यालय बम्हौरी (कम्पोजिट)
मऊरानीपुर, झाँसी (उ०प्र०)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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