32/2026, बाल कहानी- 24 फरवरी
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 32/2026
*24 फरवरी 2026 (मंगलवार)*
#बाल_कहानी- #जाम
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"फिर जाम लग गया है, क्या करें? कितनी भी जल्दी करो, ये जाम सब गड़बड़ा देता है।" सुबह सवेरे पूजा लेकर गंगोलीहाट मन्दिर जाकर जल्दी वापस घर आने का प्लान बनाए हुए कमल के चाचा जी अब काफी परेशान नजर आ रहे थे। कक्षा दो में पढ़ने वाला कमल मन ही मन सोच रहा है, "जाम, जिसमें अम्मा सब्जी बनाती है, कैसे सड़क में लग जाती होगी? जिससे सारी गाड़ियाँ जहाँ-तहाँ रुक जाती हैं। छि:..छि.. कितना गन्दा लगता है तब। गाड़ी चल रही हो तो बड़ा मजा आता है। परसों पाँच में पढ़ने वाला पूरन भी कह रहा था आते वक्त कि कैंची में कितना जाम लग गया रे। बड़ी मुश्किल से तीन घण्टे बाद खुला। घर में वह अक्सर सब्जी, भटिया व मसूर के डुबके बनाने वाले लोहे के बरतनों के नामों से ही परिचित था, जिन्हें जाम कहते हैं। वह अब भी संशय में था कि ये जाम सड़क पर कैसे लग जाते होंगे, जिससे चलती गाड़ियाँ रुक जाती हैं?"
उसने खिड़की से सिर बाहर निकाल आगे-पीछे दूर तक देखा। दोनों तरफ लम्बी लाइन लगी थी कि तभी एक बोलेरो वाला तेजी से बगल से आगे निकल गया। अन्दर बैठे सभी सयाने लोग उसे कोसने लगे, "ये! जाम खुलता न खुलता, इसने बोलेरो उल्टी तरफ से फिर घुसेड़ दी है, अब कैसे खुलेगा? पता नहीं, क्यों इतनी जल्दी हो रही है इसको?"
तभी उसे सायरन की आवाज सुनाई दी और पुलिस की गाड़ी जाते हुए दिखी। सभी कहने लगे, "अब पुलिस वाले आ गये हैं। जाम खोल देंगे।"
सभी ने राहत की साँस ली। सचमुच थोड़ी देर बाद गाड़ियाँ सरकने लगी। अन्दर सभी खुश होकर अब 'कालिका माता की जै-जै' के नारे लगाने लगे। उन्हें देख कमल भी 'जै-जै' कहने लगा।.. लेकिन अब भी एक सवाल उसके दिल में बार-बार उसे सोचने को मजबूर कर रहा था कि ये जाम सड़क पर कैसे लग जाता होगा ? उसने मन में विचार किया, "घर वापस आकर दादा जी से इसके बारे में पूछकर शाम को जरूर मालूम करूँगा।"
#संस्कार_सन्देश -
बच्चों में हर किसी के प्रति जानने की गहन अभीप्सा होती है, जिसका पूरा होना उसके आगे बढ़ने के लिए जरुरी है।
कहानीकार-
#दीवान_सिंह_कठायत (प्र०अ०)
रा० आ० प्रा० वि० उडियारी बेरीनाग
पिथौरागढ
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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