30/2026, बाल कहानी- 21 फरवरी


#दैनिक_नैतिक_प्रभात -  30/2026
*21 फरवरी 2026 (शनिवार)*
#बाल_कहानी- #बूढ़ी_अम्मा_की_सीख
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बहुत पहले की बात है, एक छोटे से गाँव किशनपुर में एक परिवार में एक बुढ़ी अम्मा रहती थी। वह बूढ़ी अम्मा और उसके पति दोनों ने मिलकर अपने जीवन को बहुत तकलीफ और संघर्ष में काटा था। उस समय बीमारियों से लोग बहुत पीड़ित रहते थे, इसलिए दोनों पति-पत्नी एक ऋषि श्रेष्ठ के पास आयुर्वेद की शिक्षा लेने माया पहाड़ पर गये।
तीन सालों तक वहीं कंद-मूल खाकर रहे और आयुर्वेद का बहुत ज्ञान प्राप्त कर लिया और फिर अपने गाँव वापस आ गए। गाँव आकर उन्होंने सभी रोगियों का इलाज किया सभी स्वस्थ होने लगे, गाँव के कुछ बच्चे बूढ़ी अम्मा के पास रोज आते थे और कहानियाँ सुनते थे। बूढ़ी अम्मा अपने बचपन से लेकर बुढ़ापे तक की बातों को उन बच्चों को कहानी के रूप में बताया करती थी। और वह अपने जीवन के संघर्ष को उन बच्चों को सुनाती थी। इस तरह वह सभी बच्चों को संघर्ष की शिक्षा देती थी। बूढ़ी अम्मा ने पाँचवीं तक पढ़ाई की थी। इस कारण वह बच्चों को पढ़ाती-लिखाती भी थी। बूढ़ी अम्मा का शिक्षा पाकर वे बच्चे विद्यालय में सबसे अधिक अंक प्राप्त करते थे। इस तरह वह बच्चों को हर प्रकार की शिक्षा देती थी। बूढ़ी अम्मा को बहुत सारे हुनर आते थे। वह बच्चों को सब सिखाती भी थी। उस छोटे से गाँव के सभी लोग बूढ़ी अम्मा के पास रोज शाम को मिलने आते थे, क्योंकि बूढ़ी अम्मा को आयुर्वेद का भी ज्ञान था। वह बूढ़ी अम्मा गाँव के सभी लोगों का इलाज करती थी। सर्दी, बुखार, खाँसी, बदन दर्द, चेचक सभी बीमारियों का इलाज करती थी। सब लोग बूढ़ी अम्मा को बहुत सम्मान देते थे | बूढ़ी अम्मा के पास आस-पास के तीन-चार गाँव के लोग भी आते थे और इलाज कराते थे | बूढ़ी अम्मा को आयुर्वेद का बहुत अच्छा ज्ञान था। 
बूढ़ी अम्मा कुछ सालों बाद चलने-फिरने में असमर्थ होने लगी तो उसने वहाँ के बहुत लोगों को आयुर्वेद का ज्ञान दिया । इस तरह वहाँ के लगभग सभी लोगों को आयुर्वेद का ज्ञान हो गया। कुछ महीने बाद बूढ़ी अम्मा की मृत्यु हो गई। गाँव के सभी लोगों को बहुत दुःख हुआ। गाँव के सभी लोगों के आँखों में आँसू था। सबने मिलकर बूढ़ी अम्मा का दाह संस्कार किया और कुछ दिन बाद एक मन्दिर बनाया गया जिसमें बुढ़ी अम्मा की मूर्ति बनाकर पूजा पाठ करना शुरू किया गया | और आज भी किशनपुर में बुढ़ी अम्मा की पूजा होती है | कहा जाता है कि कोई भी बीमारी हो किशनपुर जाने से सब ठीक हो जाता है क्योंकि किशनपुर में सभी वैध हैं | और आज भी हर बीमारी का इलाज करते हैं | धन्य है बुढ़ी अम्मा जिसने सबको आयुर्वेद का ज्ञान दिया |

#संस्कार_सन्देश -
यदि हमें किसी प्रकार का कोई भी ज्ञान हो तो हमें उसे दूसरों को भी बताना चाहिए, क्योंकि ज्ञान बाँटने से बढ़ता है।

कहानीकार-
#प्रेमलाल_किशन (स०शि०)
शासकीय प्रा० वि० बुढ़नपुर 
संकुल केन्द्र गहरीनमुड़ा,
विकास खंड व जिला-सक्ती, छत्तीसगढ़ 

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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