14/2026, बाल कहानी- 03 फरवरी
#दैनिक_नैतिक_प्रभात- 14/2026
*03 फरवरी 2026 (मंगलवार)*
#बाल_कहानी - #प्रिया_की_समझदारी
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एक गाँव था मीरापुर। वहाँ पर एक परिवार रहता था। वह परिवार बहुत ही मिलनसार और समझदार था। जो भी कोई उनके घर आता, उनकी खातिरदारी में कभी भी कोई भी कमी नहीं रहती थी । सदैव आगे-आगे बढ़कर अपने घर पर आए हुए मेहमान का स्वागत सत्कार करते थे। जो भी बन पड़ता था, सभी को खिलाने-पिलाने का प्रयास करते थे। यह सब इसी परिवार के बच्चे भी देखते और सीखते थे। उनके परिवार में जो दादी थी वह सदैव बच्चों से कहती थी, "देखो बच्चों! हमें अपने घर आए हुए लोगों का कभी भी अपमान नहीं करना चाहिए और जितना ज्यादा हो सके, उनका सम्मान करना चाहिए। उन सबका आदर सत्कार करना चाहिए और सदैव जो भी बन पड़े, चाय-नाश्ता आदि उनको पिलाना चाहिए।" ये सब बात एक छोटी-सी गुड़िया, जो अभी सिर्फ आठ साल की थी और स्कूल में पढ़ने जाती थी, बड़े ध्यान से सुन रही थी। उसे लगा, दादी बिल्कुल सही कह रही है लेकिन एक दिन उसने दादी से कहा, "दादी! कभी-कभी घर में कुछ ऐसी चीज नहीं होती हैं कि हम किसी का स्वागत सत्कार कर सके तो हमें क्या करना चाहिए?" तो दादी ने बताया, "कोशिश करनी चाहिए कि कुछ भी जो घर में है उसे ही उनका स्वागत सत्कार तो करना ही चाहिए। साथ ही साथ उनके साथ विनम्रता का व्यवहार भी करना चाहिए।"
बस क्या था, एक दिन उसके पिताजी बच्ची का नाम प्रिया था। एक दिन प्रिया के पिताजी घर में कुछ खाने का सामान और मीठा लेकर आये। प्रिया को और उसके छोटे भाई को मीठा बहुत पसन्द था। सबने खूब मजे से खूब सारा मीठा खाया, फिर भी थोड़ा बहुत बच गया तो उठा करके रख दिया।
दूसरे दिन सुबह-सुबह उनके घर में उनके पड़ोस के लोग आ गये। उनके साथ एक छोटी-सी बच्ची भी थी। अब प्रिया घर पर एकदम अकेले थी। उसने सोचा कि अगर हम इनका स्वागत सत्कार नहीं करेंगे तो दादी गुस्सा करेंगी। उसने उस मीठे को बड़ी बेमन से उनके पड़ोस की जो छोटी बच्ची आई थी, उसको खाने के लिए दे दिया। वह लोग बहुत खुश हुए और अपने घर चले गये।
रात में जब उसका छोटा भाई घर आया तो वह रोने लगा बोला कि, "प्रिया दीदी ने सारी मिठाई पड़ोस की बच्ची को खिला दी और मेरे लिए नहीं रखी। वह बहुत रोने लगा और चिल्लाने लगा कि, "मुझे तो अभी की अभी मिठाई चाहिए।" अब रात के दस बज चुके थे। उस समय मिठाई कहाँ मिलती? तब दुकान में भी बन्द हो गई थी। अब वह जिद पर अड़ा था कि, "मैं तभी सोऊँगा या कुछ काम करूँगा, जब तक मुझे मिठाई खाने को नहीं मिलेगी।" उसकी मम्मी ने सोचा, "अब क्या किया जाए?" मम्मी ने सोचा, "चलो, कुछ करते हैं।" वह रसोईघर में गयी और उन्होंने दूध निकाला। फिर उससे खोया बना दिया। अब वह खोया प्रिय के भाई ने बहुत मन से खाया। वह बहुत खुश हो गया। वह बोला, "यह वाली मिठाई तो और भी अच्छी है।" उसकी मम्मी ने सोचा, "मेरा बेटा तो बहुत खुश होता है ये मिठाई खाकर।" तो उन्होंने थोड़ा-सा खोया और बनाकर घर में रख दिया। अब क्या हुआ कि बचा हुआ दूध फट गया है। अब किसी को चाय भी नहीं मिल सकती थी। तभी अचानक प्रिया के मामा जी घर आ गये। मामा-मामी को आता देखकर प्रिया बहुत खुश हुई। लेकिन घर पर कोई भी नहीं था। सब बाहर जा चुके थे। अब प्रिया सोचने लगी कि दूध भी नहीं है। वह बहुत परेशान हुई कि, "घर में कोई ऐसा है नहीं, जिससे वह दूध मँगा ले। जो दूध था, उससे तो मम्मी ने खोया बना दिया।" तब प्रिया ने सोचा और जल्दी से अपनी बुद्धि और होशियारी से उसने खोए में पानी डालकर घोल लिया और उसको छान लिया और छान करके चाय बना करके सबके लिए ले आयी। इतने में प्रिया की मम्मी आ गयी। मम्मी देखकर बड़ा दंग रह गई कि, "घर में तो दूध था नहीं, अब प्रिया ने चाय बनाई तो कैसे बनाई?" तब उस समय तो सब मेहमान को चाय पिलाकर, नाश्ता खिलाकर विदा कर दिया गया लेकिन बाद में जब उसकी माताजी ने प्रिया से पूछा कि, "बेटा! दूध तो था नहीं, तुमने चाय कैसे बनाई?" तब प्रिया ने बताया, "मम्मी! दादी हमेशा कहती हैं, कि हमें मेहमान का आदर-सत्कार करना चाहिए, तो मुझे लगा कि मैं क्यों न चाय बना लूँ। अब जब चाय बनाने लगी तो दूध तो फट चुका था। मैंने खोया देखा, तो खोया घोलकर मैंने चाय बना दी और सबको पीने को भी दे दी। सब लोग खुश हो गए और आराम से खुशी-खुशी घर चले गये। हमने किसी का अपमान भी नहीं किया और न ऐसा किया कि किसी को चाय पिलाई बिना घर से जाने दिया।" सभी प्रिया की बुद्धिमतता पर बहुत प्रसन्न हुए।
#संस्कार_सन्देश -
सच! अगर हम समझदारी से काम करें तो सदैव किसी भी समस्या का समाधान मिल सकता है।
कहानीकार-
#अंजनी_अग्रवाल (स०अ०)
उच्च प्राथमिक विद्यालय सेमरुआ, सरसौल
कानपुर नगर (उ०प्र०)
✏️संकलन
टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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