22/2026, बाल कहानी -12 फरवरी
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 22/2026
*12 फरवरी 2026 (गुरुवार)*
#बाल_कहानी - #परम_धर्म
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सुबह जैसे ही मैं तैयार होकर स्कूल के लिए निकला तो कुछ दूरी पर किसी बच्चे के चिल्लाने की आवाज आ रही थी। मैंने दौड़कर एक संकरी गली में देखा तो एक छोटा-सा बच्चा भयभीत होकर रो रहा था। पास जाने पर पता चला कि बच्चे के पैर से खूब बह रहा है। उसके पैर पर किसी के काटने के निशान हैं। मुझे समझते देर न लगी। उसका बस्ता एक ओर पड़ा था। मैंने उसे पहचानकर पूछा, "अरे, नितिन! तुम क्यों रो रहे हो, क्या हुआ और ये..ये पैरों में किसके काटने के निशान हैं?"
"सरजी! मुझे कुत्ता ने काट लिया है। जब मैं यहाँ से निकल रहा था तो यह यहीं घात लगाये बैठा था। जैसे ही मैं यहाँ से निकला तो कुत्ते ने उछलकर मुझे काट लिया और मेरे चिल्लाने पर भाग गया।" नितिन ने फफकते हुए कहा।
"ओफ..।" मेरे मुँह से शब्द फूट पड़े। मैंने तुरन्त उसे उसके घर पहुँचाकर उसका प्राथमिक उपचार करवाया और उसके अभिभावक को तुरन्त सरकारी अस्पताल में ले जाने को कहा। नितिन के अभिभावक उसे सरकारी अस्पताल ले गये। इधर मुझे स्कूल पहुँचने में करीब एक घन्टा की देरी हो गयी। जैसे ही मैं स्कूल पहुँचा तो वहाँ बेसिक शिक्षा अधिकारी महोदय को स्कूल का निरीक्षण करते हुए पाया। मुझे आते देखकर उन्होंने पूछा, "कौन हो तुम?" मैंने नमस्कार कर अपना परिचय दिया। उन्होंने स्कूल में देर से आने का कारण पूछा। मैंने नितिन नामक बच्चे को कुत्ते द्वारा काटने और उसे घर पहुँचाकर प्राथमिक उपचार करवाने और अस्पताल भिजवाने आदि का सारा वृत्तान्त बताया। बी.एस.ए. ने मेरी बात का भरोसा नहीं किया और कहा कि, "आप हस्ताक्षर नहीं करेंगे और समय आने पर स्पष्टीकरण देना होगा।" मैं समझ गया। मैंने तुरन्त नितिन के पिता को फोन लगाया। रिसीवर ऑन कर पूछा, क्यों जीवन जी! बच्चे को लेकर अस्पताल पहुँच गये या नहीं?"
जीवन बोला, "हाँ, सर! पहुँचने ही वाला हूँ। आपका एहसास मैं कभी नहीं भूलूँगा। अगर आप स्कूल निकलते समय बच्चे को न देखते तो शायद कुत्ते का जहर अधिक फैल जाता और प्राथमिक उपचार भी न हो पाता। अभी बच्चे को राहत है। अस्पताल पहुँचकर और डाॅक्टर को दिखाकर फिर आपसे बात करते हैं।" मैंने "ठीक है।" कहकर फोन रख दिया। बी.एस.ए. सहित समस्त विद्यालय के अध्यापक और अध्यापिकाएँ फोन पर हुई बातचीत सुन रहे थे। तब-तक दो-चार ग्रामीण स्कूल में आ पहुँचे और बोले कि, "सरजी! आपने बहुत अच्छा किया जो उस बच्चे को बचा लिया। कुत्तों का आतंक हर गाँव में बढ़ रहा है। अनेक शहरों में भी इस प्रकार की अनेक घटनायें रोज पेपरों और टीवी चैनलों पर सुनने को मिलती हैं। सुना है, सरकार इसके लिए प्रयास कर रही है....?" मैंने साहब की ओर देखा। उन्होंने उठकर मुझसे कहा, "डान्ट वरी।" अच्छा, मैं चलता हूँ। रजिस्टर पर अपने हस्ताक्षर कर दीजिएगा, धन्यवाद!" मैंने भी 'धन्यवाद सर' कहकर हाथ जोड़े। यह कहकर बी.एस.ए. साहब जाने लगे। सभी उन्हें जाते हुए देख रहे थे। ग्रामीणों ने मेरी ओर हाथ से इशारा किया, "क्या हुआ?" मैंने मुस्कुराकर कहा, "कुछ नहीं। आप लोगों ने आकर सब-कुछ ठीक कर दिया है। धन्यवाद आप सभी का।" ग्रामीण धीरे-धीरे सब-कुछ समझ चुके थे।
#संस्कार_सन्देश -
हमारे स्कूल और गाँव के बच्चे हमारे अपने होते हैं। इनकी सुरक्षा और सहायता करना हमारा परम धर्म है। इसे सभी को समझना।
कहानीकार-
#जुगल_किशोर_त्रिपाठी
प्रा० वि० बम्हौरी (कम्पोजिट)
मऊरानीपुर, झाँसी (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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